वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के आश्रम की बदली व्यवस्था, दीक्षा उपस्थिति अनिश्चितकाल के लिए बंद​

वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के आश्रम की बदली व्यवस्था, दीक्षा उपस्थिति अनिश्चितकाल के लिए बंद​

वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के शिष्य रहे रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की संदिग्ध मौत के बाद आश्रम की व्यवस्थाओं में बदलाव किया गया है. आश्रम की ओर से की दीक्षा उपस्थिति को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है. बुधवार को आश्रम के बाहर मौजूद एक सेवादार ने श्रद्धालुओं को इसकी जानकारी दी और भीड़ नहीं लगाने की अपील की.

आश्रम से जुड़े एक वीडियो में एक सेवादार श्रद्धालुओं को स्थिति की जानकारी देता नजर आ रहा है. वह लोगों से आश्रम के बाहर खड़े होकर भीड़ जमा नहीं करने की अपील करता है. सेवादार के मुताबिक, प्रेमानंद महाराज की दीक्षा उपस्थिति फिलहाल अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी गई है.

अचानक सामने आई इस सूचना के बाद आश्रम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में इसे लेकर कई सवाल उठने लगे. बड़ी संख्या में लोग प्रेमानंद महाराज के दर्शन और आध्यात्मिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए वृंदावन पहुंचते हैं. ऐसे में दीक्षा से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव उनके लिए अहम माना जा रहा है.

दीपक लोधी की मौत के बाद चर्चा तेज

यह घटनाक्रम रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की संदिग्ध मौत की चर्चा के बीच सामने आया है. दीपक लोधी को प्रेमानंद महाराज का शिष्य बताया जाता रहा है. दीपक की मौत के बाद सोशल मीडिया पर आश्रम और वहां की व्यवस्थाओं को लेकर अलगअलग दावे और चर्चाएं सामने आई हैं.

क्या है दीक्षा उपस्थिति?

दीक्षा उपस्थिति आश्रम की आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़ी व्यवस्था है. इसमें दीक्षा या आध्यात्मिक मार्गदर्शन की प्रक्रिया से जुड़े श्रद्धालुओं और साधकों की मौजूदगी शामिल होती है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इसके अनिश्चितकाल के लिए बंद होने का मतलब है कि फिलहाल इस व्यवस्था के तहत श्रद्धालुओं की नियमित उपस्थिति नहीं होगी.

ड्रेस कोड में भी किया गया बदलाव

आश्रम की व्यवस्थाओं में बदलाव की चर्चा के बीच ड्रेस कोड में परिवर्तन की जानकारी भी सामने आई है. सोशल मीडिया पर प्रेमानंद महाराज से जुड़े लोगों की ओर से साझा जानकारी के मुताबिक, अब सभी शिष्यों के लिए सफेद या पीले अचला पहनना अनिवार्य नहीं होगा.

गृहस्थ जीवन जीने वाले या किसी व्यवसाय से जुड़े शिष्यों, जैसे दुकान या ठेला चलाने वालों को सामान्य कपड़े या कुर्तापायजामा पहनने की अनुमति होगी. वहीं आश्रम की सेवा या केली कुंज की व्यवस्था में लगे विरक्त शिष्यों के लिए सफेद वस्त्र पहनने की व्यवस्था बताई गई है.

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