सरकार से क्या मांग रही है E20 जनता पार्टी? नई मुहिम ने देशभर में छेड़ी बहस

सरकार से क्या मांग रही है E20 जनता पार्टी? नई मुहिम ने देशभर में छेड़ी बहस

देश में 20% एथेनॉल मिले पेट्रोल को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है. अब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बाद ‘E20 जनता पार्टी’ नाम से नया अभियान शुरू हो गया है. इस अभियान को शुरू करने वाले लोगों की पहचान अभी तक सामने नहीं आई है. इस ग्रुप ने 25 जुलाई से X पर पोस्ट करना शुरू किया है. महज दो दिनों में इसके 50 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। वहीं, इंस्टाग्राम पर भी 1 लाख से ज्यादा लोग इस अभियान से जुड़ चुके हैं. यह ग्रुप केंद्र सरकार की E20 पेट्रोल नीति का विरोध कर रहा है और इसे लेकर सोशल मीडिया पर तेजी से लोगों का समर्थन मिल रहा है.

सरकार से क्या मांग रही है E20 जनता पार्टी? नई मुहिम ने देशभर में छेड़ी बहस

E20 जनता पार्टी खुद को एक अभियान बताती है. ग्रुप का कहना है कि उसका उद्देश्य आम लोगों से जुड़े मुद्दों को उठाना, पारदर्शिता बढ़ाना, उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना और E20 पेट्रोल नीति के असर पर खुली सार्वजनिक चर्चा कराना है.

क्या हैं इस अभियान की मुख्य मांगें?

E20 जनता पार्टी की सबसे बड़ी मांग है कि देश के सभी पेट्रोल पंपों पर शुद्ध पेट्रोल भी उपलब्ध कराया जाए. यानी ग्राहकों को E0, E20 और E85 जैसे अलगअलग ईंधन में अपनी पसंद से चुनाव करने का अधिकार मिले. इनका कहना है कि इन तीनों तरह के ईंधन की उपलब्धता होनी चाहिए और ग्राहकों को सही जानकारी देकर अपनी जरूरत के हिसाब से पेट्रोल चुनने का विकल्प मिलना चाहिए. यह मांग ऐसे समय में आई है जब हाल ही में नितिन गडकरी ने E20 पेट्रोल की आलोचना पर जवाब देते हुए कहा था कि जो लोग शुद्ध पेट्रोल इस्तेमाल करना चाहते हैं, वे उसे 167 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर खरीद सकते हैं, जबकि सामान्य E20 पेट्रोल की कीमत लगभग 102.12 रुपये प्रति लीटर है.

सरकार से और क्या मांग की गई?

E20 जनता पार्टी ने सरकार से मांग की है कि सभी पेट्रोल पंपों पर स्पष्ट फ्यूल लेबलिंग की जाए ताकि लोगों को पता चल सके कि वे कौनसा ईंधन खरीद रहे हैं. इसके अलावा ये लोग चाहते हैं कि कि सरकार अलगअलग ईंधन के फायदे, नुकसान, लागत और प्रभाव से जुड़ा पूरा डेटा सार्वजनिक करे. साथ ही माइलेज, इंजन की परफॉर्मेंस, प्रदूषण और वाहन के रखरखाव पर पड़ने वाले असर को लेकर स्वतंत्र एजेंसियों से अध्ययन कराया जाए और उसकी रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जाए.

टैक्सी यूनियनों ने भी दिया समर्थन

इस अभियान को अब दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन का भी समर्थन मिल गया है. संगठन ने 4 अगस्त को संसद तक मार्च निकालने का ऐलान किया है. इस प्रदर्शन में टैक्सी चालक, टूरिस्ट वाहन मालिक और अन्य कमर्शियल वाहन संचालकों के शामिल होने की संभावना है. प्रदर्शन का नेतृत्व संगठन के अध्यक्ष संजय सम्राट करेंगे. इस विरोध प्रदर्शन में सिर्फ E20 पेट्रोल ही नहीं, बल्कि कमर्शियल वाहनों में GPS ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन अनिवार्य करने के फैसले का भी विरोध किया जाएगा.

क्या हैं आंदोलन के आरोप?

E20 जनता पार्टी का दावा है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से वाहनों का माइलेज कम हो सकता है, मेंटेनेंस खर्च बढ़ सकता है और खासकर पुराने वाहनों की परफॉर्मेंस पर असर पड़ सकता है हालांकि, केंद्र सरकार इन दावों से सहमत नहीं है. सरकार का कहना है कि अब तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से बड़े पैमाने पर वाहन प्रभावित हो रहे हैं. यानी एक तरफ कुछ नागरिक संगठन और वाहन मालिक E20 पेट्रोल पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि दूसरी ओर सरकार का कहना है कि यह नीति सुरक्षित है और इससे जुड़ी चिंताओं के समर्थन में पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बहस और तेज हो सकती है.

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