
सीतापुर जिले के हरगांवमहोली मार्ग पर स्थित बगचन गांव का प्राचीन बागेश्वर नाथ शिव मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है। सावन के पवित्र महीने में यहां बड़ी संख्या में भक्त भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। मंदिर की सबसे खास पहचान यहां स्थापित शिवलिंग है, जिसके बारे में स्थानीय मान्यता है कि यह 24 घंटे में तीन बार अपना रंग बदलता है।
खुदाई के दौरान प्रकट हुआ था शिवलिंग
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, कई वर्ष पहले राजा लोने सिंह के टीले के पास जंगल क्षेत्र में खुदाई के दौरान यह शिवलिंग प्रकट हुआ था। जनश्रुति यह भी कहती है कि ब्रिटिश शासनकाल में अंग्रेज अधिकारियों ने शिवलिंग को स्थानांतरित करने और उसकी गहराई मापने का प्रयास किया था, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।
चबूतरा बनाते समय बढ़ने लगा शिवलिंग का आकार
मंदिर से जुड़ी एक और प्रचलित मान्यता के अनुसार, जब शिवलिंग के चारों ओर चबूतरे का निर्माण कराया जा रहा था, उसी दौरान उसका आकार स्वत बढ़ने लगा। यही वजह है कि इस मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था बनी हुई है।
सालभर होते हैं धार्मिक आयोजन
बागेश्वर नाथ मंदिर में पूरे वर्ष रुद्राभिषेक, रामायण पाठ और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता रहता है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। सावन के दौरान यहां विशेष पूजाअर्चना के साथ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है।
शिवलिंग के रंग बदलने की मान्यता
मंदिर के पुजारी स्वामी रामस्वरूप ब्रह्मचारी के अनुसार, इस शिवलिंग की सबसे अनोखी विशेषता यह है कि यह 24 घंटे के भीतर तीन बार अपना रंग बदलता है। वहीं स्थानीय श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मंदिर से प्राप्त जल को अपने साथ ले जाने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। हालांकि, यह स्थानीय धार्मिक मान्यता है।