Quick Samachar: सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड मामले में बाजार नियामक SEBI की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है. SEBI ने प्रतिभूति अपीलीय अधिकरण के उस आदेश के हिस्से को चुनौती दी है, जिसमें SICCL के चार प्रबंधकों और कंपनी सचिव को राहत दी गई थी.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी मोहन की पीठ ने मामले को इसी मुद्दे से जुड़ी लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ते हुए जुलाई में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है.
मामला 1998 से 2008 के बीच जारी किए गए ‘वैकल्पिक रूप से पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर’ से जुड़ा है. SAT ने अपने 9 मार्च के आदेश में SICCL के खिलाफ की कार्रवाई को बरकरार रखते हुए कंपनी और उसके निदेशकों की अपील खारिज कर दी थी.
SICCL केस में SEBI पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
अधिकरण ने कहा था कि OFCD का निर्गम सार्वजनिक निर्गम की श्रेणी में आता है और इस कारण यह SEBI के नियामकीय दायरे में आता है. SICCL ने इन डिबेंचर के जरिए करीब 1.98 करोड़ निवेशकों से लगभग 14,106 करोड़ रुपये जुटाए थे.
SAT ने यह भी माना था कि इतनी बड़ी संख्या में निवेशकों से इतनी बड़ी रकम जुटाना निजी नियोजन नहीं माना जा सकता, जैसा कि कंपनी का दावा था.
SICCL केस में चार अधिकारियों को राहत का मामला
हालांकि, अधिकरण ने चार प्रबंधकों और कंपनी सचिव की अलग अपील स्वीकार करते हुए कहा था कि केवल कर्मचारी होने के आधार पर उन्हें कंपनी के कार्यों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.
अब SEBI ने इसी हिस्से को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. यह मामला SEBI के अक्टूबर 2018 के आदेश से जुड़ा है, जिसमें कंपनी को निवेशकों से जुटाई गई राशि लौटाने, संपत्तियों का विवरण देने और कुछ अधिकारियों को प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया गया था.
💬 Comments (0)
Leave a Comment