सिंधु समझौता तो रोक दिया, पर भारत ने 17 महीनों से पाकिस्तान का पानी क्यों नहीं बंद किया?

सिंधु समझौता तो रोक दिया, पर भारत ने 17 महीनों से पाकिस्तान का पानी क्यों नहीं बंद किया?
सिंधु समझौता तो रोक दिया, पर भारत ने 17 महीनों से पाकिस्तान का पानी क्यों नहीं बंद किया?

‘खून और और पानी एक साथ नहीं बह सकता’, ये कहकर भारत ने आंतकवाद को पालने वाले पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौता रद्द कर दिया था. पाकिस्तान के आलाकमान तभी से डरे हुए हैं, वो इंटरनेशनल मंचों पर जाकर बार-बार रो रह है. शहबाज शरीफ तो UN में जाकर बोल आए कि ‘अगर पानी रुका तो ये एक्ट ऑफ वॉर माना जाएगा’. 17 महीनों से पाकिस्तान दुनिया के सामने घड़ियाली आंसू बहा रहा है क्योंकि भारत ने पानी जमीनी स्तर पर अभी तक बंद नहीं किया है. अब सवाल उठता है कि इतना बड़ा फैसला लेने के बाद भी भारत ने अभी तक पश्चिमी नदियों का पानी रोका क्यों नहीं?

भारत ने 17 महीने पहले क्यों दी थी पाकिस्तान को सजा?
इस पूरे मामले की शुरुआत 22 अप्रैल 2025 को हुई थी, जब कश्मीर के खूबसूरत इलाके पहलगाम में पाकिस्तान से भेजे हुए आतंकियों ने धर्म पूछ-पूछकर 26 मासूम पर्यटकों की जान ली थी. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इस आतंकी वारदात से देश भर में भारी गुस्सा फैल गया था. हमले के ठीक अगले ही दिन यानी 23 अप्रैल 2025 को भारत सरकार ने एक बहुत बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया. भारत ने 1960 से चले आ रहे ऐतिहासिक सिंधु जल समझौते को रोकने का ऐलान कर दिया.

तभी भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने दुनिया के सामने भारत का रुख साफ कर दिया था. उन्होंने कहा था कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार से होने वाले आतंकवाद को पूरी तरह और हमेशा के लिए बंद नहीं कर देता, तब तक ये समझौता रुका ही रहेगा.

भारत के इस कड़े फैसले से पाकिस्तान में हड़कंप मच गया और वो तुरंत नीदरलैंड्स के हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत पहुंच गया. हाल ही में इस अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि ये संधि अभी भी लागू मानी जाएगी. लेकिन भारत ने इस फैसले को ठुकराने में जरा भी देर नहीं की. भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया कि ये अदालत गैर-कानूनी तरीके से बनाई गई थी, इसलिए इसके किसी भी फैसले को भारत नहीं मानता.

इस पूरे विवाद और पानी की राजनीति को समझने के लिए ये जानना बहुत जरूरी है कि 1960 में हुआ सिंधु जल समझौता आखिर है क्या? ये ऐतिहासिक समझौता 19 सितंबर 1960 को कराची में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था, जिसमें विश्व बैंक ने बिचौलिए की भूमिका निभाई थी. इस संधि के तहत सिंधु नदी सिस्टम की 6 प्रमुख नदियों को दो हिस्सों में बांट दिया गया था.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *