70 खंभों पर खड़ा है यह मंदिर, एक भी खंभा जमीन को नहीं छूता

70 खंभों पर खड़ा है यह मंदिर, एक भी खंभा जमीन को नहीं छूता
70 खंभों पर खड़ा है यह मंदिर, एक भी खंभा जमीन को नहीं छूता


दक्षिण भारत के प्रमुख मंदिरों में लेपाक्षी मंदिर अपने वैभवशाली इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। यह दक्षिणी आंध्रप्रदेश के अनंतपुर जिले में है। यह मंदिर हैंगिंग पिलर टेम्पल भी कहलाता है। मंदिर कुल 70 खंभों पर खड़ा है जिनमें से एक भी खंभा जमीन को नहीं छूता है। सारे खंभे हवा में झूलते हुए हैं।

वर्षों पहले यहां एक खंभा जमीन पर टिका हुआ था लेकिन एक ब्रिटिश इंजीनियर ने इसका रहस्य जानना चाहा और इस कोशिश में इस एकमात्र खंभे का भी जमीन से संपर्क टूट गया। माना जाता है कि यहां लटके हुए खंभों के नीचे से एक कपड़ा निकालने पर परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

इस मंदिर का संबंध रामायण काल से जुड़ा है। यह मंदिर वीरभद्र को समर्पित है। वीरभद्र दक्ष यज्ञ के बाद अस्तित्व में आया भगवान शिव का एक क्रूर रूप है। इसके अलावा शिव के अर्द्धनारीश्वर, कंकालमूर्ति, दक्षिणमूर्ति और त्रिपुरारेश्वर रूप भी यहां दर्शनीय हैं।

यहां देवी को भद्रकाली कहा जाता है। यह मंदिर 16 वीं सदी में बनाया गया था और यह पूरी तरह एक ही पत्थर की संरचना है। मंदिर विजयनगरी शैली मेंबनाया गया है। इस मंदिर में एक पत्थर पर एक पदचिह्न भी अंकित है (चित्र देखें) और मान्यता है कि माता सीता का पद चिह्न है।

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