
गर्मी का मौसम केवल पसीना, उमस और तेज धूप का नाम नहीं है। कई बार धरती और उसके ऊपर मौजूद सतहें इतनी गर्म हो जाती हैं कि उन्हें छूना भी मुश्किल हो जाता है। कल्पना कीजिए कि किसी शहर के फुटपाथ का तापमान 158 डिग्री फॉरेनहाइट यानी करीब 70 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए। ऐसी स्थिति में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि फुटपाथ खुद एक गर्म तवे की तरह व्यवहार करने लगे।
तेज धूप में सड़क, कंक्रीट और फुटपाथ आसपास के वातावरण की तुलना में कहीं अधिक गर्म हो सकते हैं। इसका कारण यह है कि ये सतहें सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा को सोखकर लंबे समय तक अपने भीतर बनाए रखती हैं। हवा का तापमान भले ही 4045 डिग्री सेल्सियस हो, लेकिन धूप में पड़ी गहरी रंग की सड़क या कंक्रीट की सतह उससे काफी अधिक गर्म हो सकती है।
158 डिग्री फॉरेनहाइट का तापमान लगभग 70 डिग्री सेल्सियस होता है। इस तापमान पर कच्चा अंडा किसी गर्म सतह पर डालने पर उसके सफेद हिस्से में मौजूद प्रोटीन तेजी से जमने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि हर 70 डिग्री सेल्सियस फुटपाथ पर अंडा उसी तरह आसानी से पक जाएगा जैसे रसोई के तवे पर। सतह का तापमान, अंडे की मात्रा, धूप की तीव्रता, हवा और फुटपाथ की गर्मी को स्थानांतरित करने की क्षमता जैसे कई कारक परिणाम को प्रभावित करते हैं।
फिर भी यह उदाहरण गर्मी के बढ़ते प्रभाव को समझने का प्रभावी तरीका है। जब शहरों में कंक्रीट, डामर और दूसरी कठोर सतहों का विस्तार होता है, तो वे सूर्य की गर्मी को सोखकर आसपास के वातावरण को भी गर्म करते हैं। इसे शहरी ऊष्मा द्वीप यानी ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव कहा जाता है। पेड़ों और हरियाली की कमी इस समस्या को और बढ़ा देती है।
ऐसे हालात केवल असुविधा पैदा नहीं करते, बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी चुनौती बन सकते हैं। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। अत्यधिक गर्म सतहों के संपर्क में आने से त्वचा जलने का खतरा बढ़ता है और लंबे समय तक अत्यधिक गर्म वातावरण में रहने से शरीर पर हीट स्ट्रेस का असर पड़ सकता है। बुजुर्गों, बच्चों, खुले में काम करने वाले श्रमिकों और बीमार लोगों के लिए यह जोखिम और अधिक गंभीर हो सकता है।
इसलिए ‘फुटपाथ पर अंडा तलने’ की बात केवल एक रोचक प्रयोग या गर्मी का मुहावरा नहीं है। यह उस बदलती जलवायु और बढ़ते शहरी तापमान की चेतावनी भी है, जिसके कारण हमारे शहर रहने के लिए लगातार अधिक गर्म होते जा रहे हैं। शहरों में पेड़ लगाना, हरित क्षेत्र बढ़ाना, छायादार फुटपाथ बनाना और गर्मी सोखने वाली सतहों के बजाय बेहतर शहरी डिजाइन अपनाना अब केवल सौंदर्य का विषय नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरत है।