
बलिया (उत्तर प्रदेश): बलिया जिले के चिलकहर ब्लॉक के नरावं गांव में एक महुआ का पेड़ इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का दावा है कि यह हरा-भरा पेड़ पिछले छह दिनों से अंदर ही अंदर सुलग रहा है। हैरानी की बात यह है कि बारिश होने के बावजूद पेड़ की गर्माहट कम नहीं हुई और बाहर से धुआं भी दिखाई नहीं दे रहा। इस अनोखी घटना को देखने के लिए दूर-दूर से लोग गांव पहुंच रहे हैं।
स्थानीय लोगों के बीच इस घटना को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हैं। कुछ इसे प्रकृति का अनोखा रहस्य मान रहे हैं, जबकि कई लोग इसे चमत्कार और दैवीय संकेत बताकर पेड़ की पूजा-अर्चना करने लगे हैं। पेड़ के नीचे लाल कपड़ा, ईंटें और चढ़ावा रखा गया है तथा कुछ लोगों ने यहां मंदिर बनाने की भी बात कही है।
पूर्व सैनिक संघ के अध्यक्ष महात्मा सिंह ने बताया कि सोशल मीडिया पर पेड़ में आग लगने की खबर देखने के बाद वे मौके पर पहुंचे। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के अनुसार पेड़ में बीच-बीच में आग जैसी लपट दिखाई देती है, लेकिन धुआं नहीं निकलता। उनके मुताबिक, इस तरह की घटना की वास्तविक वजह वैज्ञानिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीण अवधेश पांडेय ने पेड़ के पास त्रिशूल स्थापित कर दिया है। उनका कहना है कि लोग इस पेड़ को अब ‘महुआ बाबा’ के रूप में मानने लगे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि घटना के पीछे कोई प्राकृतिक या वैज्ञानिक कारण भी हो सकता है और जांच से जो तथ्य सामने आएंगे, उन्हें स्वीकार किया जाना चाहिए।
वहीं, कई अन्य ग्रामीण इसे अपनी आस्था से जोड़ रहे हैं। गांव में कीर्तन और सुंदरकांड पाठ का आयोजन भी शुरू हो गया है तथा श्रद्धालु पेड़ के पास पहुंचकर पूजा और चढ़ावा चढ़ा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इस घटना की वैज्ञानिक जांच कराई जानी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि पेड़ के भीतर लगातार गर्मी या सुलगने जैसी स्थिति किस कारण बनी हुई है। फिलहाल यह रहस्यमयी घटना पूरे इलाके में कौतूहल और चर्चा का विषय बनी हुई है।