अमेरिका के स्कूलों में गोलीबारी की घटनाओं के बाद अब पेपर स्प्रे ड्रोन की तैनाती का फैसला लिया गया है. इन खास तरह के ड्रोन की तैनाती पहले कोलोराडो, फ़्लोरिडा और जॉर्जिया के स्कूलों में की जाएगी. दावा किया गया है कि पुलिस के रेस्पॉन्स से पहले यह हमलावर को रोक सकता है. इस ड्रोन को टेक्सास की कंपनी मिथ्रिल डिफेंस ने “कैंपस गार्डियन एंजल” नाम से विकसित किया.

इस ड्रोन का मकसद पुलिस के पहुंचने से पहले ही हमलावर को रोकना है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। कंपनी के सीईओ जस्टिन मार्स्टन का कहना है, ये ड्रोन स्कूल के गलियारों में 50 मील प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकते हैं और महज 15 सेकंड में हमलावर तक पहुंचने का लक्ष्य रखते हैं. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ये ड्रोन 70 मील प्रति घंटे तक की रफ्तार पकड़ सकते हैं और गोलीबारी से बचने के लिए हवा में तेजी से मूवमेंट भी कर सकते हैं.
क्या है पेपर स्प्रे ड्रोन?
यह ऐसा ड्रोन है जो स्कूल के गलियारों में नजर रखते हैं. इसे शिक्षक कंट्रोल करेंगे. कंपनी के सीईओ के अनुसार, जब कोई शिक्षक ऐप पर बटन दबाता है या साइलेंट पैनिक बटन दबाता है तो स्कूल के सभी कैमरों की फीड और नक्शा उनके कंट्रोल सेंटर पर आ जाता है, और वहां से लक्ष्य 5 सेकंड में तय होकर 15 सेकंड में हमलावर तक पहुंचने की कोशिश होती है.
यह ड्रोन खिड़कियां तोड़ने में भी सक्षम हैं.
कैसे काम करता है?
एक बार हमलावर तक पहुंचने के बाद ड्रोन कई चरणों में रिएक्शन देता है. पहले यह हवा में आवाज़ करने वाले “एयर पॉपर” छोड़ता है और हमलावर को सरेंडर करने को कहता है, इसके बाद पेपर राउंड दागे जाते हैं, और ज़रूरत पड़ने पर 70 मील प्रति घंटे की रफ्तार से हमलावर से टकराया भी जा सकता है.
ड्रोन खिड़कियां तोड़ने में भी सक्षम हैं. इसे लाइट, सायरन और पेपर जेल स्प्रे से लैस किया गया है. पेपर स्प्रे अपनी रक्षा के लिए काम में आने वाला रसायन है, जिसे तीखी मिर्च के अर्क से बनाया जाता है. इसके अलावा ड्रोन में स्पीकर भी लगे हैं, जिनसे हमलावर या छात्रोंस्टाफ से सीधे बात की जा सकती है.
Some schools in Florida, Georgia and Colorado will be equipped with drones this year that can go through halls, smash windows and pepperspray active shooters if teachers report a threat. pic.twitter.com/ojOBeZxfxd
— KolHaolam July 29, 2026
कहांकहां हो रही तैनाती?
फिलहाल नौ स्कूलों में यह सिस्टम लगाया जा रहा है. इसमें फ्लोरिडा के तीन, जॉर्जिया के पांच और कोलोराडो का एक स्कूल है, जहां इन्हें रखने के लिए विशेष स्टोरेज बॉक्स बनाए गए हैं. जॉर्जिया में फ्लोरिडा के बाद दूसरे राज्य के तौर पर इस पायलट प्रोजेक्ट को मंज़ूरी मिली, और वहां बुलोच काउंटी, चेरोकी काउंटी, कॉफी काउंटी, गेन्सविल सिटी और ट्रूप काउंटी के पांच स्कूल डिस्ट्रिक्ट इसमें शामिल हैं.
क्यों पड़ी ज़रूरत?
कोलोराडो का कोलंबाइन हाई स्कूल नरसंहार , फ्लोरिडा का मार्जरी स्टोनमैन डगलस हाई स्कूल शूटिंग और जॉर्जिया का अपालाची हाई स्कूल शूटिंग , ये सभी राज्य पहले भी भयावह स्कूली गोलीबारी झेल चुके हैं.
पिछले तीन सालों में अमेरिका में करीब एक हज़ार स्कूलों में गोलीबारी की घटनाएं हो चुकी हैं, जो पिछले दशक के मुकाबले दस गुना ज़्यादा है. कंपनी का दावा है कि किसी भी हमले के पहले 120 सेकंड सबसे अहम होते हैं, क्योंकि ज़्यादातर गोलीबारी इसी दौरान होती है.
सवाल भी उठ रहे?
नई तकनीक की तरह इस पर भी सवाल उठ रहे हैं. कोलोराडो की एक अभिभावक जेनिफर आइवरसन ने चिंता जताई कि अगर ड्रोन गलती से किसी बच्चे पर पेपर स्प्रे कर दे तो क्या होगा. उनके मुताबिक, इसमें कई नैतिक और कानूनी सवाल जुड़े हैं.
आलोचकों ने गलत पहचान के खतरे, भागते छात्रों या मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों को नुकसान पहुंचने की आशंका, और सीमित स्कूल बजट को रोकथाम के बजाय हार्डवेयर पर खर्च करने पर भी सवाल उठाए हैं. पॉलिसी मेकर्स का यह भी कहना है कि ऐसे किसी भी ड्रोन प्रोग्राम के लिए सख्त दिशानिर्देश ज़रूरी हैं, ताकि पेपर स्प्रे जैसे हथियारों का इस्तेमाल सिर्फ तय स्थितियों में ही हो.