सरकार की Meta को दो टूक, भारत में नहीं चलेगी मनमानी, दे डाली चेतावनी!

सरकार की Meta को दो टूक, भारत में नहीं चलेगी मनमानी, दे डाली चेतावनी!

भारत सरकार और मेटा के बीच ऑनलाइन कंटेंट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को लेकर बातचीत जारी है. इस बीच सरकार ने मेटा को साफ कर दिया है कि भारत में किसी तरह की मनमानी नहीं चलेगी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने कहा है कि मेटा को भारत में काम करते समय सिर्फ अपनी ग्लोबल पॉलिसी के आधार पर नहीं, बल्कि भारतीय कानूनों के अनुसार भी काम करना होगा. सरकार का कहना है कि मेटा की गाइडलाइंस और कंटेंट पॉलिसी भारत के कानूनों के अनुरूप होनी चाहिए.

सरकार की Meta को दो टूक, भारत में नहीं चलेगी मनमानी, दे डाली चेतावनी!

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने मेटा को अपने एल्गोरिदम को पूरी तरह बदलने का नहीं कहा है. सरकार की मुख्य चिंता यह है कि प्लेटफॉर्म पर कंटेंट की निगरानी और उसे हटाने की प्रक्रिया भारत के कानून और यहां की परिस्थितियों के हिसाब से हो.

भारत की भाषा और संस्कृति को समझना जरूरी

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि भारत की भाषाएं और सांस्कृतिक परिस्थितियां काफी अलग हैं. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। विदेशों में बैठे मेटा के मॉडरेशन सिस्टम और टीमों के लिए भारतीय संदर्भ को पूरी तरह समझना आसान नहीं है. इसी वजह से सरकार ने मेटा से ज्यादा स्थानीय भागीदारी बढ़ाने को कहा है. खासकर भारतीय भाषाओं और स्थानीय संस्कृति को बेहतर तरीके से समझकर कंटेंट मॉडरेशन करने पर जोर दिया गया है.

CSAM पर जीरो टॉलरेंस

चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल यानी बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को लेकर सरकार का रुख बेहद सख्त है. अधिकारियों ने साफ कहा है कि ऐसे कंटेंट के मामले में जीरो टॉलरेंस होना चाहिए. सरकार ने मेटा से केवल आश्वासन देने के बजाय मजबूत और सक्रिय कदम उठाने की मांग की है. अधिकारियों का कहना है कि अगर इस तरह की सामग्री प्लेटफॉर्म पर मौजूद रहती है तो यह गंभीर नियम उल्लंघन है.

डीपफेक को लेकर भी सरकार की चिंता

डीपफेक को लेकर भी सरकार ने मेटा से कई सवाल पूछे हैं. अधिकारियों ने कहा कि किसी बड़े व्यक्ति के अधिकृत या वेरिफाइड अकाउंट से पोस्ट की गई सामग्री को सिर्फ तकनीकी सिस्टम के आधार पर डीपफेक नहीं माना जाना चाहिए. सरकार ने ऐसे मामलों में Human in the loop व्यवस्था की जरूरत बताई है. यानी किसी संवेदनशील कंटेंट को हटाने से पहले इंसानी जांच होनी चाहिए. इसके अलावा सरकार ने यह भी सवाल उठाया कि जो सिंथेटिक कंटेंट पहले डीपफेक के तौर पर पहचाना और हटाया जा चुका है, वह दोबारा प्लेटफॉर्म पर कैसे दिखाई दे रहा है. मेटा से इसे रोकने के लिए ठोस कदमों की जानकारी मांगी गई है.

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