भारतीय शेयर बाजार के प्राइमरी मार्केट में कमाई का महाकुंभ शुरू होने जा रहा है! 30 सितंबर की डेडलरइन खत्म होने से पहले दलाल स्ट्रीट पर आईपीओ लाने की एक अभूतपूर्व रेस शुरू हो चुकी है. करीब 34 दिग्गज कंपनियां बाजार से 45,000 करोड़ रुपए की भारीभरकम रकम जुटाने के लिए अपने पब्लिक इश्यू उतारने की तैयारी में हैं. सेबी के नियमानुसार, कंपनियों द्वारा DRHP में जमा किए गए मार्च तिमाही के ऑडिटेड वित्तीय आंकड़ों की वैधता केवल 30 सितंबर तक होती है. इस तारीख के बाद कंपनियों को दोबारा नए सिरे से फाइनेंशियल रिपोर्ट तैयार करनी पड़ती है, जिससे बचने के लिए कंपनियां जल्दबाजी में हैं.

टेक्नोलॉजी, फिनटेक, रिटेल, हेल्थकेयर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स की कंपनियों में रिटेल और संस्थागत निवेशकों के लिए पोर्टफोलियो डायवर्सिफाई करने का यह बेहतरीन अवसर है. जुटाई जाने वाली पूंजी का बड़ा हिस्सा कंपनियां अपने बिजनेस एक्सपेंशन और पुराने कर्जों को चुकाने में इस्तेमाल करेंगी, जिससे कॉरपोरेट ग्रोथ को गति मिलेगी. इससे पहले मार्केट रेगुलेटर ने कंपनियों को नए ड्राफ्ट पेपर फाइल किए बिना इश्यू साइज को 50 फीसदी तक बढ़ाने या बदलने की भी इजाजत दी थी, जबकि पहले यह लिमिट 20 फीसदी थी. आइए इसके बारे विस्तार से बात करते हैं…
बैंकर उत्साहित
प्राइम डेटाबेस के अनुसार, क्रेडीला फाइनेंशियल सर्विसेज, डॉर्फकेटल केमिकल्स इंडिया, कंटिन्यूम ग्रीन एनर्जी, वेरिटास फाइनेंस, प्रेस्टीज हॉस्पिटैलिटी वेंचर और इनोवेटिवव्यू इंडिया जैसी कंपनियों के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस की मंज़ूरी 30 सितंबर तक खत्म होने वाली है. 10 अगस्त और 30 सितंबर के बीच 52 दिन हैं, लेकिन साप्ताहिक छुट्टियों और 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी की ट्रेडिंग छुट्टी को हटाने के बाद, यह समय घटकर 35 वर्किंग डेज रह जाता है. हालांकि, बैंकर ज़्यादा परेशान नहीं हैं, क्योंकि तेल की कीमतें कम हुई हैं और पूर्वी एशिया में AIबेस्ड वैल्यूएशन में गिरावट के बाद विदेशी फंड कभीकभार खरीदार बन गए हैं.
कोटक इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के मैनेजिंग डायरेक्टर और इक्विटी कैपिटल मार्केट्स के हेड, कौशल शाह ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि बाजार में कई इश्यू लाने के लिए अभी भी काफी समय है, क्योंकि अगस्त के मध्य तक कई IPO पहले से ही कतार में हैं, और 30 सितंबर अभी भी कुछ दूर है. जुलाई में 12 इश्यू से लगभग 28,649 करोड़ जुटाने के बाद, अगस्त में अब तक आठ IPO लॉन्च किए गए हैं, जिनसे कुल 10,636 करोड़ रुपए जुटाए गए हैं. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। 2026 के पहले सात महीनों में, सेकेंडरी मार्केट की अनिश्चित स्थितियों के बावजूद 39 IPO से 51,000 करोड़ रुपए जुटाए गए. शाह का अनुमान है कि जुलाईअगस्त में लगभग 40,000 करोड़ रुपए के IPO कतार में हैं.
लंबा है प्रोसेस
आम तौर पर नया DRHP फाइल करना पसंदीदा विकल्प नहीं होता है. इंडीपेंडेंट मार्केट एक्सपर्ट दीपक जसानी के अनुसार, ऐसा इसलिए है क्योंकि इस प्रोसेस में 3 से 5 करोड़ रुपए का नया खर्च, सेबी फाइलिंग फीस का भुगतान, अपडेटेड ऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट, नई कानूनी जांचपड़ताल और सेबी के रिव्यू प्रोसेस में 6090 दिन और लग सकते हैं. प्राइम डेटाबेस ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रणव हल्दिया ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि रीफाइलिंग के प्रोसेस से बचने के लिए, कुछ कंपनियों ने बाजार की स्थितियों को देखते हुए या तो वैल्यूएशन कम कर दिया है, इश्यू का आकार घटा दिया है या लॉन्च को पूरी तरह टाल दिया है. IPO वैल्यूएशन को लेकर इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की आपत्तियों के कारण भी कंपनियों को शेयर बिक्री टालनी पड़ी है, जैसा कि ज़ेप्टो के मामले में हुआ.
ये कंपनियां हैं कतार में
करमतारा इंजीनियरिंग, इमेजिन मार्केटिंग, मौरी टेक, रवि इंफ्राबिल्ड प्रोजेक्ट्स, ग्रीव्स इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ल्यूमिनो इंडस्ट्रीज, रुनवाल एंटरप्राइजेज, RITE वॉटर सॉल्यूशंस, LCC प्रोजेक्ट्स, प्रोजील ग्रीन एनर्जी और ए वन स्टील्स इंडिया जैसी अन्य कंपनियां भी 30 सितंबर से पहले अपने IPO लॉन्च करने पर विचार कर रही हैं. यह सिलसिला सितंबर की भीड़भाड़ से आगे भी जारी रहेगा. प्राइम डेटाबेस के अनुसार, डेडलाइन के करीब पहुंच चुके 34 इश्यू के अलावा, सेबी की मंजूरी वाली 133 अन्य कंपनियां जुलाई 2027 के अंत तक IPO के जरिए कुल मिलाकर 2.22 लाख करोड़ रुपए से अधिक जुटाने की योजना बना रही हैं. शाह ने कहा कि आखिरकार फैसला कीमत और समय के बीच संतुलन बनाने पर निर्भर करता है. जो कंपनियां मानती हैं कि उन्हें सही वैल्यू नहीं मिल रही है, वे बेहतर बाजार स्थितियों का इंतजार कर सकती हैं.