
कानपुर, अमृत विचार। सात साल के बाद सोमवार के संयोग से इस बार और भी फलदायिनी नागपंचमी होने जा रही है। प्रकृति में संतुलन और जीवनशक्ति के संवर्धन के लिए भारतीय संस्कृति में नाग पूजा का पर्व नागपंचमी इस बार 17 अगस्त सोमवार को मनाई जाएगी।वर्ष 2026 से पहले सोमवार के दिन नाग पंचमी 5 अगस्त 2019 को पड़ी थी। उस दिन सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि होने के साथसाथ सावन का तीसरा सोमवार भी था।
भगवान शिव के गले का हार नागों के पूजन का यह शास्त्रीय पर्व भगवान शिव के प्रिय दिवस सोमवार को पड़ने से इस बार और भी फलदायी माना जा रहा है। नाग पंचमी के दिन श्रद्धालु विशेष रूप से नाग देवता की पूजा करते हैं। इस दिन लोग अपने घरों में नाग की आकृति बनाते हैं और उन्हें दूध, मिठाई और अन्य भोग अर्पित करते हैं।
ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी
ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष, राहुकेतु से जुड़े दोष हों, उनके लिए यह दिन विशेष पूजा, रुद्राभिषेक और नाग पूजा के लिए शुभ माना जाता है। कालसर्प दोष को जीवन की रुकावटों, मानसिक तनाव और आर्थिक उतारचढ़ाव का बड़ा कारण माना जाता है। जब कुंडली में सभी सात ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, तब कालसर्प योग का निर्माण होता है। नाग पंचमी का दिन नाग देवताओं और राहुकेतु के प्रभावों को शांत करने के लिए वर्ष का सबसे शक्तिशाली अवसर माना गया है।
इसके अलावा इस दिन सूर्य का सिंह राशि में प्रवेश आध्यात्मिक साधना, आत्मबल, नेतृत्व क्षमता और प्रतिष्ठा को मजबूत करने वाला शुभ संयोग है। ऐसे में यह शुभ अवसर एक ही दिन पड़ने से यह तिथि और भी खास मानी जा रही है।
नाग पंचमी पूजा
चांदी के नाग नागिन का जोड़ा: चांदी या तांबे से बने नागनागिन के जोड़े का कच्चे दूध और गंगाजल से अभिषेक करें। पूजा के बाद इन्हें किसी पवित्र बहते जल में प्रवाहित कर दें।
शिवलिंग का विशेष अभिषेक: तांबे के लोटे में जल, थोड़ा कच्चा दूध, गंगाजल और काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें।
मंत्र जाप: अभिषेक करते समय लगातार “ॐ नम शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।