
सुलतानपुर। अंतरराष्ट्रीय परिधान ब्रांड UNIQLO के नाम पर कथित फर्जी निवेश योजना चलाकर 24.47 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर साइबर क्राइम थाना सुलतानपुर में अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
व्हाट्सएप मैसेज से शुरू हुआ पूरा खेल
दरियापुर निवासी शिवम गुप्ता ने न्यायालय में दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया कि जुलाई 2025 में उनके व्हाट्सएप पर निवेश से जुड़ा एक आकर्षक संदेश आया। इसके बाद उन्हें एक टेलीग्राम ग्रुप से जोड़ा गया, जहां दावा किया गया कि UNIQLO भारत में अपना कारोबार बढ़ा रही है और निवेश करने पर दो से तीन गुना तक लाभ मिलेगा।
विश्वास दिलाने के लिए उन्हें एक कथित वेबसाइट पर आईडी बनवाकर निवेश और मुनाफे का डिजिटल रिकॉर्ड भी दिखाया गया।
छोटे निवेश के बाद बढ़ाया भरोसा
शिवम के अनुसार, शुरुआत में उन्होंने 10 हजार रुपये का निवेश किया, जिसके बाद वेबसाइट पर दोगुना लाभ दिखाई दिया। इसके बाद उन्हें लगातार अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रार्थना पत्र के मुताबिक, 28 जुलाई से 27 अगस्त 2025 के बीच उन्होंने यूनियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, एचडीएफसी बैंक तथा क्रेडिट कार्ड के माध्यम से विभिन्न बैंक खातों में कुल 24,47,639 रुपये ट्रांसफर कर दिए।
रकम निकालने पर मांगे गए और पैसे
पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी जमा राशि निकालने का प्रयास किया तो ठगों ने पहले “सिविल स्कोर डाउन” होने का हवाला दिया और बाद में जीएसटी व अन्य शुल्क जमा करने के नाम पर अतिरिक्त रकम की मांग की।
संदेह होने पर जांच करने पर उन्हें पता चला कि UNIQLO की भारत में इस प्रकार की कोई निवेश योजना संचालित नहीं है और उसके नाम से कई कथित फर्जी वेबसाइटें चलाई जा रही हैं।
कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा
शिवम गुप्ता ने पहले 1930 साइबर हेल्पलाइन और साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक से भी कार्रवाई की मांग की। आरोप है कि कार्रवाई न होने पर उन्होंने न्यायालय का रुख किया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद साइबर क्राइम थाना सुलतानपुर में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
फर्जी वेबसाइट और बैंक खातों की जांच शुरू
पुलिस अब मामले में इस्तेमाल किए गए फर्जी वेबसाइट, टेलीग्राम ग्रुप, मोबाइल नंबर और बैंक खातों की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां साइबर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने का प्रयास कर रही हैं।