शेख हसीना की वापसी एक कानूनी मुद्दा, भारत के रुख में कोई बदलाव नहीं

शेख हसीना की वापसी एक कानूनी मुद्दा, भारत के रुख में कोई बदलाव नहीं

भारत ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वापसी पर अपने रुख में कोई बदलाव न होने की बात कही है, इसे कानूनी मुद्दा बताया।

शेख हसीना की वापसी एक कानूनी मुद्दा, भारत के रुख में कोई बदलाव नहीं

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की ढाका वापस लौटने की योजना के बीच भारत ने मंगलवार को सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस मुद्दे पर उसके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “इस मामले में हमारे रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। प्रत्यर्पण का कोई भी मामला एक कानूनी मुद्दा है और इसे उसी के अनुसार निपटाया जाएगा।” उन्होंने यह जवाब इस मुद्दे पर एक प्रश्न पर दिया।

बता दें कि हिंसक छात्र आंदोलन के चलते पांच अगस्त, 2024 को हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार अपदस्थ हो गई थी। वह उसी समय से भारत में रह रही हैं। उन्होंने पिछले सप्ताह कहा था कि वह स्वेच्छा से स्वदेश लौटने की योजना बना रही हैं।

78 वर्षीय हसीना ने एक इंटरव्यू में कहा था, “वे मेरी वापसी पर मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, वे मुझे मार भी सकते हैं। फिर भी मुझे जाना है।” बांग्लादेश उनके प्रत्यर्पण के लिए भारत से कई बार आग्रह कर चुका है।

दक्षिण चीन सागर पर भारत ने ट्रिब्यूनल के फैसले का किया समर्थन

भारत ने दक्षिण चीन सागर में नौवहन, उड़ान की स्वतंत्रता और निर्बाध व्यापार की वकालत की है। इसके साथ ही भारत ने 2016 के एक इंटरनेशनल ट्रिब्यूलन के उस फैसले का समर्थन किया, जिसमें इस क्षेत्र पर चीन की व्यापक दावे को खारिज कर दिया गया था।

विदेश मंत्रालय का यह बयान अमेरिका, ब्रिटेन और एक दर्जन से ज्यादा पश्चिमी व एशियाई देशों की ओर से चीन को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण के उस फैसले की याद दिलाए जाने के दो दिन बाद आया है, जिसमें क्षेत्र पर उसके व्यापक दावों को अवैध करार दिया गया था।

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