Humidity causes Pimples: उमस कैसे बन जाती है पिंपल्स की वजह? समझें पूरा लॉजिक

Humidity causes Pimples: उमस कैसे बन जाती है पिंपल्स की वजह? समझें पूरा लॉजिक

क्या आप जानते हैं कि बारिश में उमस ही नहीं पॉल्यूशन भी एक्ने और पिंपल का एक कारण है. इन दोनों का कॉम्बिनेशन हमारी स्किन की सेहत को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाता है. उत्तर भारत में अप्रैल से सितंबर तक काफी गर्मी पड़ती है. गर्मी भी स्किन की हेल्थ को खराब करने में बड़ा रोल निभाती है. उमस, गर्मी, पसीना और गंदगी की वजह से हमारे पोर्स बंद होने लगते हैं. एक्सपर्ट कहते हैं कि देखरेख में कमी पिंपल्स या एक्ने का सबसे बड़ा कारण है.

Humidity causes Pimples: उमस कैसे बन जाती है पिंपल्स की वजह? समझें पूरा लॉजिक

कहीं बारिश के सीजन में आपकी स्किन के साथ भी ऐसा तो नहीं होता है? इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है? इसके साइंटिफिक कारण क्या है और बचाव के लिए आप किन तरीकों को अपना सकते हैं. जानें….

मॉइस्चर और स्किन का कनेक्शन

बताया जाता है कि इंसान से शरीर में 20 से 40 लाख स्वेट ग्लैंड्स होते हैं. ये गर्मी और उमस के कारण और एक्टिव हो जाते हैं. पसीन में पानी और नमक होता है. ये स्किन को नुकसान नहीं पहुंचाता लेकिन अगर ये जल्दी न सूखे तो तब प्रॉब्लम बढ़ती है. ऐसे में स्किन में बाहर स्ट्रेटम कार्नियम कमजोर होने लगती है और पोर्स बंद होने लगते हैं. ऐसे में पिंपल्स ज्यादा निकलते हैं.

पोर्स का बंद होना

एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर पोर्स बंद है और डेड सेल्स बाहर नहीं निकल पाते हैं. इनके अंदर फंस जाने की वजह से ब्लैकहेड्स, वाइटहेड्स और पिंपल्स होने लगते हैं. इसलिए उमस और गर्मी वाले मौसम में बीचबीच में स्क्रबिंग जरूर करनी चाहिए.

प्रदूषण कैसे बनता है कारण

हवा में पीएम 2.5 पार्टिकल्स मौजूद होते हैं, इसके अलावा धूपमिट्टी और पॉल्यूशन के दूसरे टाइप हमारी स्किन पर बैठ जाते हैं. ये कण, स्किन के नेचुरल ऑयल के साथ मिलकर पोर्स में जमा हो जाते हैं. कणों के साथ पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन और धातुएं जैसी हानिकारक चीजें भी स्किन में जाती हैं और डैमेज तेजी से बढ़ जाता है.

ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस

पॉल्यूशन के कण जब स्किन में जाते हैं तो इंफ्लामेशन और एक्स्ट्रा ऑयल की प्रॉब्लम बढ़ जाती है. ऐसे में मानसून की उमस, सीबम प्रोडक्शन का बिगड़ना और देखरेख में की के कारण स्किन में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं. गर्मी और उमस में कटीबैक्टीरियम एक्नीस नाम के बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं. ये बैक्टीरिया ही पिंपल्स को बढ़ाता है.

ध्यान रखें ये चीजें

  1. अगर आप उमस और गर्मी वाले मौसम में स्किन को नेचुरली ठीक रखना चाहते हैं तो ऐसे तरीके अपनाएं जिनकी हेल्प से पोर्स बंद न हो.
  2. लाइटवेट और नॉनकॉमेडोजेनिक सनस्क्रीन का यूज करें क्योंकि इनसे हमारे पोर्स बंद नहीं होते.
  3. सैलिसिलिक एसिड वाले फेस वॉश और क्लींजर स्किन की गंदगी को निकालने और ऑयल प्रोडक्शन के बिगड़े हुए प्रोसेस को ठीक करते हैं.
  4. बाहर से आ रहे हैं तो स्किन को अच्छे से क्लीन करें क्योंकि ऐसा करने से पॉल्यूशन के कण स्किन पर लंबे समय तक टिक नहीं पाते.
  5. सबसे जरूरी है कि विटामिन सी की चीजें लगाएं और इससे बनी खाने की चीजों का सही तरीके से सेवन करें. ये विटामिन सूजन को कम करता है और फ्री रेडिकल्स के नुकसान से भी बचाता है. वैसे नियासिनामाइड वाले सीरम भी बेस्ट रिजल्ट देते हैं.

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