Quick Samachar: भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी हैं, जिन्होंने सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर ही नहीं बल्कि तकनीकी और क्रिएटिव स्तर पर भी नए स्टैंडर्ड सेट किए हैं. पहले के समय फिल्मों में तकनीकों का इस्तेमाल ज्यादा होता नहीं था, लेकिन धीरे-इन्हीं में से एक है क्लासिक फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’, जिसे आज भी बॉलीवुड की सबसे भव्य फिल्मों में गिना जाता है. दिलीप कुमार और मधुबाला की इस फिल्म ने अपनी कहानी, सेट और संगीत से दर्शकों को प्रभावित किया था, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस फिल्म ने एक और बड़ा रिकॉर्ड बनाया था.

साल 1960 में रिलीज हुई थी, इस फिल्म को लोगों ने खूब पसंद किया था और इसने कमाई भी अच्छी की थी. फिल्म की रिलीज को इतने साल गुजर चुके हैं, लेकिन आज भी फिल्म की भव्यता को लेकर बात होती रहती है. इस फिल्म ने रिलीज के बाद कई रिकॉर्ड बनाए थे. हालांकि, इसके बावजूद कम लोगों को पता होगा कि ये फिल्म केवल हिंदी में नहीं बनी थी, बल्कि इस फिल्म को दो और भाषा में बनाया गया था.
दूसरे भाषा में सक्सेस नहीं मिली
दरअसल, ये बॉलीवुड की पहली ऐसी फिल्म मानी जाती है, जिसे तीन भाषाओं में शूट किया गया था. फिल्म हिंदी के साथ ही साथ तमिल और इंग्लिश में भी बनी थी, लेकिन जहां हिंदी में फिल्म ब्लॉकबस्टर निकली, तो वहीं तमिल ने इस फिल्म ने अच्छा परफॉर्म नहीं किया. इसी को देखते हुए मेकर्स ने ‘मुगल-ए-आजम’ को इंग्लिश में रिलीज ही नहीं किया. के आसिफ के डायरेक्शन में बनी ‘मुगल-ए-आजम’ को बनाने में 16 साल लगे थे और इसकी भव्यता उस दौर से काफी आगे की थी.
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जोखिम भरा था मेकर्स का फैसला
फिल्म के हर सीन को बड़े पैमाने पर तैयार किया गया था. लेकिन मेकर्स ने सिर्फ सेट और कहानी पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि फिल्म को ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचाने के लिए इसे अलग-अलग भाषाओं में शूट करने का फैसला भी किया. उस समय ये एक्सपैरिमेंट काफी बड़ा और जोखिम भरा माना जाता था, क्योंकि तकनीक सीमित थी और शूटिंग में समय भी ज्यादा लगता था. फिल्म में दिलीप कुमार, मधुबाला, पृथ्वीराज कपूर जैसे एक्टर्स शामिल थे.
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