Quick Samachar: Lucknow Building Fire: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भयावह अग्निकांड के बाद शासन से लेकर प्रशासन तक में हड़कंप मचा हुआ है. 15 मासूमों की जान जाने के बाद नींद से जागे लखनऊ विकास प्राधिकरण ने मंगलवार को उस अवैध तीन मंजिला इमारत को एक बार फिर गिराने का नोटिस जारी कर दिया है. इसके साथ ही, एक रिहायशी इमारत को वर्षों तक गैरकानूनी तरीके से कमर्शियल स्पेस के रूप में संचालित होने देने के मामले में एलडीए ने अपने ही विभाग के अधिकारियों और इंजीनियरों पर हंटर चलाना शुरू कर दिया है.

लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया हमने अलीगंज की उस इमारत को निर्माण संबंधी नियमों के उल्लंघन को लेकर एक बार फिर गिराने का नोटिस जारी किया है, जहां सोमवार को यह दर्दनाक हादसा हुआ था. इसके साथ ही हमने लापरवाही बरतने वाले विभागीय अधिकारियों के खिलाफ भी आंतरिक जांच शुरू कर दी है और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
उपाध्यक्ष ने साफ किया कि इस गंभीर लापरवाही में शामिल रहे तत्कालीन और वर्तमान अधिकारियों को चिह्नित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है, ताकि इतने सालों में उनकी संलिप्तता और भूमिका का पूरा सच सामने आ सके.
2016 में भी जारी हुआ था तोड़ने का आदेश
इस इमारत का इतिहास भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही की गवाही देता है. अधिकारियों के मुताबिक, तीन मंजिला इस इमारत को साल 2016 में ही गैरकानूनी और अवैध निर्माण के कारण गिराने का अंतिम आदेश दिया गया था. लेकिन सिस्टम की सांठगांठ का खेल देखिए कि महज दो महीने से भी कम समय के भीतर उस कड़े आदेश को चुपके से वापस ले लिया गया. इसी विभागीय लापरवाही और मिलीभगत का नतीजा रहा कि यह ‘डेथ ट्रैप’ सालों तक बिना किसी रोकटोक के चलता रहा और आखिर में 15 परिवारों के चिराग बुझ गए.
4 आरोपी सलाखों के पीछे, 4 अधिकारी सस्पेंड और SIT का गठन
अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों पर पुलिस और प्रशासन ने ताबड़तोड़ एक्शन लिया है. पुलिस ने सोमवार को कार्रवाई करते हुए इस मामले में चार मुख्य जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान रामकृष्ण उपाध्याय , वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला , तुषार कृष्ण जायसवाल और सुरेश कुमार साहू के रूप में हुई है.
इसके साथ ही, प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर बिजली विभाग, अग्निशमन विभाग और लखनऊ विकास प्राधिकरण के चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.
अलीगंज के सेक्टरडी स्थित ऊषा मेहता मार्ग पर हुई इस दर्दनाक घटना की गहराई से जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक हाईलेवल विशेष जांच दल का गठन किया है. इस दो सदस्यीय एसआईटी में अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और अपर पुलिस महानिदेशक लखनऊ जोन, प्रवीण तिवारी शामिल हैं, जो पूरे मामले की रिपोर्ट जल्द शासन को सौंपेंगे.
जानिए क्या था पूरा अलीगंज अग्निकांड और कैसे हुआ यह भीषण हादसा?
यह हृदय विदारक और रूह कंपा देने वाली घटना सोमवार दोपहर लखनऊ के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक अलीगंज के सेक्टरडी में घटित हुई. नियमों को ताक पर रखकर रिहायशी इलाके में खड़ी की गई इस तीन मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में ‘हेड हॉपर 3D आर्ट स्टूडियो’ नाम का एक एनिमेशन सेंटर और कोचिंग हब चल रहा था. इस बिल्डिंग के पहले फ्लोर पर एक पेट शॉप थी, दूसरे फ्लोर पर ग्राफिक एनिमेशन का सेंटर था और सबसे टॉप फ्लोर यानी तीसरी मंजिल पर एक प्राइवेट लाइब्रेरी संचालित थी, जहां दर्जनों छात्रछात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे.
बायोमेट्रिक थंबलॉक गेट बना काल, घुट गया मासूमों का दम
सोमवार दोपहर को अचानक बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर स्थित एनिमेशन सेंटर में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई. देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग में जहरीला और घना काला धुआं भर गया. इस तथाकथित आधुनिक ऑफिस का मुख्य दरवाजा ‘थंब एम्प्रेशन’ से लॉक और अनलॉक होता था. आग लगते ही जैसे ही बिल्डिंग की बिजली कटी, वह बायोमेट्रिक सिस्टम पूरी तरह जाम हो गया और गेट ऑटोमैटिक लॉक हो गया. इसके चलते अंदर मौजूद छात्रों को बाहर निकलने का कोई रास्ता ही नहीं मिला.
पूरी बिल्डिंग को शीशों से पैक किया गया था, जिसमें कोई भी आपातकालीन निकास द्वार नहीं था और न ही कोई चालू फायर फाइटिंग सिस्टम उपलब्ध था. नीचे उतरने का इकलौता संकरा रास्ता पूरी तरह आग और धुएं की चपेट में आ चुका था. जान बचाने के लिए बच्चे कमरों और बाथरूम में छिप गए, जहां ऑक्सीजन खत्म होने और कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के कारण अधिकांश बच्चों का दम घुट गया.
दीवार तोड़कर किया गया रेस्क्यू, 15 की मौत और 9 घायल
मौके पर पहुंची दमकल और रेस्क्यू टीम को अंदर फंसे बच्चों तक पहुंचने के लिए कंक्रीट की मजबूत दीवार तोड़नी पड़ी. इस अग्निकांड में 15 मासूमों की जिंदा जलने और दम घुटने से दर्दनाक मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर छात्र थे जो अपने सुनहरे भविष्य का सपना लेकर यहां पढ़ने आए थे. इसके अलावा 9 अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जिनका अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में इलाज चल रहा है. इस भयावह घटना ने एक बार फिर शहरों में धड़ल्ले से चल रहे अवैध कमर्शियल बेसमेंट्स और कोचिंग सेंटर्स की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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