
लखनऊ, अमृत विचार। शहीद पथ किनारे गोमतीनगर व गोमतीनगर विस्तार इलाके में बने व्यावसायिक व आवासीय भवनों में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगों ने ‘मिनी जामताड़ा’ चला रहा हैं। महज 16 दिन में दो बड़े गिरोह का खुलासा क्राइम ब्रांच, साइबर क्राइम व साइबर क्राइम सेल की संयुक्त टीम ने किया।
एक जुलाई को समिट बिल्डिंग में अमेरिकी नागरिकों से ठगी करने वाले गिरोह के 119 लोगों को दबोचा था। ठीक 16वें दिन ओमेक्स आर2 में छापा मारकर चार फ्लैट से सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरोह ने आठ माह के अंदर अमेरिकी नागरिकों को डिजीटल अरेस्ट कर 200 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की। पुलिस टीम को मौके से कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, बैंक के दस्तावेज व डेटा मिले हैं।
एडीसीपी क्राइम किरन यादव के मुताबिक ओमेक्स आर2 में पकड़े गये गिरोह को देखकर मिनी जामताड़ा की याद आ गई। यहां बंद कमरों में बैठकर अमेरिकी नागरिकों को माइक्रोसाफ्ट सपोर्ट और फेडरल ट्रेड कमीशन का अधिकारी बन डिजीटल अरेस्ट कर ठगी की जाती थी। छापेमारी के दौरान पुलिस को अमेरिका की रहने वाली एक महिला डोरिश की डिटेल मिली है। जिससे साफ है गिरोह ने उसे डिजिटल अरेस्ट कर 70 हजार डालर यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 70 लाख रुपये की ठगी की थी। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि जो भी अमेरिकी नागरिक उनके जाल में फंस जाता था, उसके खाते को पूरी तरह खाली कर दिया जाता था।
गिरोह आधुनिक तकनीक, वीओआइपी कालिंग सिस्टम और विशेष साफ्टवेयर के जरिए अमेरिका के नागरिकों का डाटा जुटाता था। इसके बाद उनके लैपटाप और कंप्यूटर पर वायरस और मैलवेयर से जुड़े फर्जी पापअप भेजे जाते थे। पापअप में दिए गए टोल फ्री नंबर पर काल करने पर आरोपी खुद को माइक्रोसाफ्ट सपोर्ट का प्रतिनिधि बताते थे। इसके बाद पीड़ितों को डराया जाता था कि उनके बैंक खाते, डिजिटल वालेट या सोशल सिक्योरिटी नंबर का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में हुआ है और उनके खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई हो सकती है। मानसिक दबाव बढ़ने पर काल दूसरे एजेंट को ट्रांसफर कर दी जाती थी, जो खुद को एफटीसी या साइबर सुरक्षा एजेंसी का अधिकारी बताकर और अधिक भय पैदा करता था।
विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए गिरोह नकली सरकारी दस्तावेज, फर्जी कोर्ट आदेश, आइडेंटिटी थेफ्ट रिपोर्ट और एफटीसी लेटर ईमेल के जरिए भेजता था। इसके बाद टीम व्यूअर और अल्ट्रा व्यूअर एप के जरिए पीड़ितों के कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस लेकर बैंकिंग जानकारी हासिल कर ली जाती थी। जांच में पता चला है कि गिरोह सीधे बैंक खातों में रकम नहीं लेता था। पीड़ितों से अमेजन और वालमार्ट के गिफ्ट कार्ड खरीदवाए जाते थे। बड़ी रकम के मामलों में अमेरिका में मौजूद सहयोगियों के जरिए नकदी और सोने की डिलीवरी भी उठाई जाती थी। बाद में रकम को क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल वाउचर के जरिए ट्रांसफर कर दिया जाता था, ताकि जांच एजेंसियां वित्तीय ट्रेल तक न पहुंच सकें।
इनकी हुई गिरफ्तारी, ये माल हुआ बरामद
एडीसीपी क्राइम किरन यादव के मुताबिक छापेमारी के दौरान मौके से गुजरात अहमदाबाद नारोल करडावती निवासी पुनीत कुमार वर्मा, कोलकाता कडाया मियाजन ओस्तागर लेन का मो. सोहेल, 24परगना कोलकाता जीजे खान रोड का मो. शाहनवाज आलम, नारकेल डागा का मो. इमरान, कोलकाता इस्माइल स्टेट का मो. रियाज, अहमदाबाद अनमोल रत्न अपार्टमेंट न्यू नरोड़ा का दीपेन चंद्र कांत पटेल और कोलकाता घोस बगान लेन का सज्जाद हुसैन उर्फ सरफराज शामिल हैं। आरोपियों के पास से आठ लैपटॉप, 9 मोबाइल, दो कंप्यूटर माउस, एक बाउ आउट, 9 हेडफोन, 4 वाईफाई इंटरनेट राउटर, पांच लैपटॉप चार्जर बरामद किया गया है। इनमें विदेशी नागरिकों का डाटा, कालिंग स्क्रिप्ट, ईमेल टेंपलेट और फर्जी दस्तावेज मिले हैं।
समिट बिल्डिंग की तरह संचालित हो रहा था गिरोह
एडीसीपी क्राइम किरन यादव के मुताबिक ओमेक्स में पकड़े गए काल सेंटर का संचालन काफी हद तक समिट बिल्डिंग में पकड़े गए अंतरराष्ट्रीय काल सेंटर जैसा है। दोनों जगह विभिन्न राज्यों से युवाओं की भर्ती की गई थी। अंग्रेजी बोलने वाले और बीपीओ का अनुभव रखने वाले कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाती थी। कर्मचारियों के रहने और खाने की व्यवस्था भी गिरोह खुद करता था और किसी प्रकार का नियुक्ति पत्र या अनुबंध नहीं दिया जाता था। साथ ही गिरफ्तार करने वाली टीम को 25 हजार का नकद इनाम दिया गया है।
छठवीं पास चला रहा था गिरोह
पुलिस के मुताबिक गिरोह का सरगना गुजरात के अहमदाबाद स्थित करडावती निवासी पुनीत वर्मा है। वह छठवीं पास है। गिरोह के गिरफ्तार सदस्यों में दो छठवीं पास है। वहीं 3 इंटर, एक हाईस्कूल व एक आठवीं पास है। सरगना पुनीत के अलावा मो. इमरान छठवीं पास है। वहीं, शाहनवाज, मो. रियाज और सज्जाद हुसैन उर्फ सरफराज की सबसे ज्यादा इंटर की पढ़ाई किये हैं। इसके अलावा मो. सोहेल आठवीं, दीपेन चंद्र पटेल दसवीं पास है। पढ़ाई भले ही कम हो, लेकिन इनकी अंग्रेजी फर्राटेदार है। जब अमेरिकी नागरिकों से बातचीत करते हैं तो उनके भी होश उड़ जाते थे। पुलिस अब इस मामले में बरामद इलेक्ट्रॉनिक गैजेट की फोरेंसिक जांच कराने जा रही है।