आज के समय में वाहन खरीदते समय इंजन और माइलेज के साथ सुरक्षा फीचर्स भी सबसे अहम हो गए हैं. बाइक और स्कूटर में ब्रेकिंग सिस्टम को लेकर ABS और CBS दो प्रमुख टेक्नोलॉजी इस्तेमाल की जाती हैं. दोनों का काम ब्रेक लगाने के दौरान वाहन को कंट्रोल में रखना है, लेकिन इनके काम करने का तरीका अलग होता है. ABS जहां पहियों को लॉक होने से रोकता है, वहीं CBS आगे और पीछे के ब्रेक के बीच बैलेंस बनाता है.

ABS क्या है और कैसे करता है काम
ABS यानी एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम एक एडवांस सुरक्षा तकनीक है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। अचानक तेज ब्रेक लगाने पर कई बार बाइक या कार के पहिए लॉक हो जाते हैं, जिससे वाहन फिसल सकता है. ABS सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट की मदद से पहियों की गति को लगातार मॉनिटर करता है और जरूरत के हिसाब से ब्रेक प्रेशर को कम ज्यादा करता है. इससे वाहन पर कंट्रोल बना रहता है और फिसलने की संभावना कम हो जाती है.
CBS कैसे करता है ब्रेक बैलेंस
CBS यानी कंबाइंड ब्रेकिंग सिस्टम एक ऐसी तकनीक है, जिसमें आगे और पीछे के ब्रेक एक साथ काम करते हैं. जब राइडर ब्रेक लगाता है तो सिस्टम दोनों पहियों पर ब्रेकिंग फोर्स को बांट देता है. इससे अचानक ब्रेक लगाने पर बाइक का बैलेंस बेहतर रहता है. यह तकनीक खासतौर पर स्कूटर और छोटे इंजन वाली बाइकों में ज्यादा देखने को मिलती है.
ABS और CBS में क्या है बड़ा अंतर
ABS और CBS दोनों का उद्देश्य सुरक्षा बढ़ाना है, लेकिन दोनों की तकनीक अलग है. CBS केवल ब्रेकिंग फोर्स को बैलेंस करता है, जबकि ABS पहियों को लॉक होने से रोकता है. खराब सड़क, बारिश या तेज रफ्तार में अचानक ब्रेक लगाने पर ABS ज्यादा प्रभावी साबित होता है क्योंकि यह वाहन को स्किड होने से बचाने में मदद करता है. वहीं CBS सामान्य परिस्थितियों में बेहतर ब्रेक बैलेंस देता है.
कौन सा सिस्टम ज्यादा सुरक्षित है
सुरक्षा के लिहाज से ABS को CBS से ज्यादा एडवांस माना जाता है. खासकर तेज रफ्तार, गीली सड़क या इमरजेंसी ब्रेकिंग की स्थिति में ABS ज्यादा बेहतर कंट्रोल देता है. हालांकि CBS भी छोटे वाहनों में सुरक्षा बढ़ाने वाला उपयोगी फीचर है. अगर बजट और विकल्प उपलब्ध हो तो ABS वाला वाहन ज्यादा सुरक्षित चुनाव माना जाता है.
भारत में ABS और CBS को लेकर नियम
भारत में दोपहिया वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए सरकार ने ब्रेकिंग सिस्टम को लेकर नियम बनाए हैं. 125 सीसी से ज्यादा क्षमता वाली बाइकों में ABS या बेहतर ब्रेकिंग सिस्टम को जरूरी बनाया गया है, जबकि छोटे दोपहिया वाहनों में CBS जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. इसका उद्देश्य सड़क हादसों में कमी लाना और राइडर की सुरक्षा बढ़ाना है.