
बाराबंकी, अमृत विचार। जिला मुख्यालय पर रोडवेज बस स्टैंड से डिग्री कॉलेज जाने वाले मार्ग पर दीवानी कचहरी गेट के ठीक बगल लंबे समय से संचालित हो रहा अवैध साइकिलबाइक स्टैंड अब सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्टैंड के संचालन की वैधता और इसे लेकर प्रशासनिक अनुमति स्पष्ट नहीं है।
इसके बावजूद यहां रोजाना बड़ी संख्या में बाइक और अन्य वाहन खड़े कराए जा रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर स्टैंड अधिकृत है तो इसके ठेके, अनुमति, संचालक और राजस्व संबंधी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं है? ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। और यदि इसकी कोई वैध अनुमति नहीं है तो इतने लंबे समय से इसका संचालन कैसे हो रहा है?
रोडवेज बस स्टैंड से रेलवे स्टेशन तक का मार्ग जिलाधिकारी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है। मार्ग के सुंदरीकरण और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने का काम लगातार जारी है। ऐसे में दीवानी कचहरी गेट के ठीक बगल सड़क किनारे वाहनों का स्टैंड संचालित होना पूरे प्रोजेक्ट की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक तरफ प्रशासन प्रमुख मार्गों को अतिक्रमण मुक्त कराने और यातायात व्यवस्था सुधारने की कवायद कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ कचहरी जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थल के पास सड़क के किनारे बड़े पैमाने पर वाहन खड़े कराए जा रहे हैं। इससे ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ को ही ठेंगा दिखता नजर आ रहा है। यह मामला केवल जाम और अतिक्रमण तक सीमित नहीं है। कचहरी के गेट के ठीक बगल बड़ी संख्या में अज्ञात लोगों के वाहन खड़े होते हैं।
ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है। कल्पना कीजिए कि कोई अंजान व्यक्ति विस्फोटक जैसी संदिग्ध सामग्री किसी बाइक में रखकर उसे स्टैंड में खड़ा कर जाए। ऐसी स्थिति में वाहन की पहचान, मालिक का सत्यापन और निगरानी की व्यवस्था क्या है? किसी संदिग्ध वाहन की जांच कौन करेगा? यदि कोई बड़ा हादसा हो जाता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
लोगों ने कहा कि यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि दीवानी कचहरी में प्रतिदिन अधिवक्ताओं, वादकारियों, न्यायिक एवं प्रशासनिक कर्मचारियों और आम लोगों की बड़ी संख्या में आवाजाही रहती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि स्टैंड का संचालन किसी वैध ठेके या अनुमति के आधार पर नहीं हो रहा है तो वाहनों से वसूली जाने वाली रकम का हिसाब भी सवालों के घेरे में है।
आरोप यह भी है कि सरकारी व्यवस्था के दायरे से बाहर होने पर शासन को मिलने वाला संभावित राजस्व निजी जेब में जा सकता है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। ऐसे में सबसे जरूरी है कि जिला प्रशासन पूरे मामले की जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करे।
जिला प्रशासन शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने, अतिक्रमण हटाने और प्रमुख मार्गों को व्यवस्थित करने पर जोर दे रहा है। इसके बावजूद कचहरी गेट के ठीक बगल लंबे समय से संचालित इस स्टैंड पर कार्रवाई या स्पष्टता न होना प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि स्टैंड की वैधता, ठेका, अनुमति, संचालक और वाहन पार्किंग से होने वाली वसूली की जांच कराई जाए।
यदि स्टैंड अधिकृत है तो उसकी अनुमति और शर्तों को सार्वजनिक किया जाए और यदि अवैध है तो तत्काल कार्रवाई करते हुए मार्ग को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। अब देखने वाली बात यह होगी कि डीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट के बीच कचहरी गेट के बगल चल रहे इस बाइक स्टैंड पर प्रशासन की नजर कब पड़ती है और सुरक्षा से जुड़े इन गंभीर सवालों का जवाब कौन देता है।