
अमृत विचार : शहर बरेली की माटी की तासीर ही कहेंगे कि क्रांतिकारियों ने यहां ब्रितानिया हुकूमत को बारबार नाको चने चबाने को मजबूर कर दिया थ। 1857 की क्रांति हो या अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन की गूंज, हर बार बरेली से अंग्रेजो भारत छोड़ों की आवाज जोरदार तरीके से बुलंद हुई थी। मुंबई के ग्वालियर टैंक मैदान से महात्मा गांधी आह्वान का असर बरेली तक देखने को मिला था। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। बरेली में इस आंदोलन की अगुवाई स्वाधीनता सेनानी सेठ दामोदर स्वरूप ने की। उस समय बड़ी तादाद में सेनानियों को जेल में ठूस दिया गया था।
वरिष्ठ साहित्यकार सुधीर विद्यार्थी की किताब ”बरेली एक कोलाज” 9 अगस्त 1942 से बरेली में शुरू हुई क्रांति की गौरवगाथा को सामने लाती है। लेखक ने बरेली में हुई अगस्त क्रांति के नायकों में ताराचरन रस्तोगी, मोहन सिंह बंदा, पडिंत विश्व नारायण,मुंशी उधोनारायण, चिंरजीवलाल गुप्त जैसे भुला दिए गए क्रांतिकारियों का जिक्र प्रमुखता से किया है।
ताराचंद रस्तोगी को बाबाएरुहेलखंड भी कहा गया, जो बाद में बड़े शिक्षाविद के तौर पर पहचान पाए थे। उन्होंने साथी इकराम हुसैन, विश्वेश्वर दयाल मिश्र के साथ मिलकर कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम को आग के हवाले कर दिया था। क्रांतिकारी गोरखा सिपाही को चकमा देकर कलेक्ट्रेट में दाखिल हुए थे और रिकॉर्ड रूम के रोशनदान से तेल डालकर आग लगा दी थी। उस घटना में कलेक्ट्रेट के एक कर्मचारी पीडी जोशी का भी सहयोग रहा, जिन्हें बाद में पकड़ लिया गया था।
10 अगस्त को गिरफ्तार कर लिए गए थे कांग्रेस नेता
सुधीर विद्यार्थी बताते हैं कि उस समय महात्मा गांधी की गिरफ्तारी का संदेश सभी जगह पहुंच चुका था। लिहाजा बरेली में भी जगहजगह जुलूस निकाले जाने लगे। 10 अगस्त की सुबह बरेली के कई कांग्रेसी नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। दामोदर स्वरूप सेठ, धर्मदत्त वैद्य, पंडित दीनानाथ मिश्र, दरबारी लाल शर्मा, ऊधौनारायण मिश्र, चिरंजीवलाल, ब्रजमोहन लाल शास्त्री, मोहनलाल युवंशी, राममूर्ति जैसे नेताओं को अरेस्ट कर लिया गया था। प्रतापचंद्र आजाद की गिरफ्तारी पहले ही कर ली गई थी।
लाठियां खाकर भी लगाते रहे भारत माता के नारे
बरेली के भूले बिसरे क्रांतिकारियों में मोहन सिंह बंदा को याद करना जरूरी होगा। वे ऐसे उत्साही फ्रीडम फाइटर थे, जिनको अंग्रेजी हुकमरानों की क्रूरता का जरा भी खौफ नहीं था। 12 अगस्त को उन्होंने धारा 144 का तोड़ी थी, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें बीच बाजार में लाठियों से पीटना शुरू कर दिया। इसके बाद वह भारत माता की जय के नारे लगाते रहे थे।