Gluten Free Diet Trend: ग्लूटेन कैसे शरीर को पहुंचाता है नुकसान, ये लोग रहे अलर्ट, एक्सपर्ट ने बताया

Gluten Free Diet Trend: ग्लूटेन कैसे शरीर को पहुंचाता है नुकसान, ये लोग रहे अलर्ट, एक्सपर्ट ने बताया

ग्लूटेन एक नेचुरल प्रोटीन है, जो गेहूं, जौ और राई जैसे अनाज में पाया जाता है. ज्यादातर लोगों के लिए इसे खाना बिल्कुल सुरक्षित होता है. लेकिन कुछ लोगों में ग्लूटेन खाने के बाद शरीर का इम्यून सिस्टम या पाचन तंत्र अलग तरह से रिएक्ट करने लगता है. यानी शरीर ग्लूटेन को ऐसे समझने लगता है, जैसे ये कोई नुकसान पहुंचाने वाली चीज हो. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। दरअसल, ग्लूटेन फ्री डाइट आजकल ट्रेंड में है. ऐसा माना जाता है कि ग्लूटेन आंतों में जाकर चिपक जाता है.

Gluten Free Diet Trend: ग्लूटेन कैसे शरीर को पहुंचाता है नुकसान, ये लोग रहे अलर्ट, एक्सपर्ट ने बताया

इसके अलावा लोग ऐसा भी मानते हैं कि ग्लूटेन को पचाना आसान नहीं होता. कहीं आप भी तो ग्लूटेन से जुड़े कई मिथक पर भरोसा तो नहीं करते हैं. चलिए आपको एक्सपर्ट के जरिए बताते हैं…

कैसे ग्लूटेन बन जाता है हमारे शरीर का दुश्मन?

डॉ. मानसी निगम कहती हैं कि सीलिएक एक ऑटोइम्यून बीमारी है. इसके होने पर अगर कोई ग्लूटेन खाता है तो शरीर का इम्यून सिस्टम छोटी आंत पर ही हमला करने लगता है. इससे छोटी आंत में मौजूद बहुत छोटे छोटे उंगली जैसे हिस्से, जिन्हें विली कहा जाता है खराब होने लगते हैं. यही विली हमारे खाने से पोषक तत्वों को शरीर तक पहुंचाने का काम करते हैं. इसलिए धीरे धीरे शरीर को जरूरी पोषण मिलना कम हो जाता है और कई तरह की सेहत से जुड़ी दिक्कतें शुरू हो सकती हैं.

किन लोगों पर ज्यादा खतरा

ग्लूटेन से होने वाला नुकसान इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति को कौन सी समस्या है. अगर किसी को सीलिएक डिजीज है और वह लगातार ग्लूटेन खाता रहता है, तो उसे बार बार दस्त लगना, पेट फूलना, पेट दर्द, वजन कम होना, हमेशा थकान रहना, आयरन की कमी से एनीमिया, हड्डियां कमजोर होना और बच्चों में सही तरीके से बढ़त न होना जैसी परेशानियां हो सकती हैं. अगर लंबे समय तक इसका इलाज न हो, तो आगे चलकर ऑस्टियोपोरोसिस, बांझपन, कुछ दिमाग और नसों से जुड़ी समस्याएं, लिवर की दिक्कतें और बहुत कम मामलों में आंत के कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है.

इसके अलावा जिन्हें टाइप 1 डायबिटीज, डाउन सिंड्रोम या टर्नर सिंड्रोम जैसी जेनेटिक कंडीशन हो, सेलेक्टिव आईजीए डिफिशिएंसी, डर्मेटाइटिस हर्पेटिफॉर्मिस, बिना वजह आयरन की कमी, कम उम्र में ऑस्टियोपोरोसिस या लंबे समय से पेट की दिक्कत बनी हुई हो.. उन्हें भी ग्लूटेन खाने से प्रॉब्लम्स हो सकती है.

कुछ लोगों में नॉन सीलिएक ग्लूटेन सेंसिटिविटी होती है. इन्हें ग्लूटेन की वजह से पेट फूलना, कब्ज या दस्त, सिरदर्द, दिमाग ठीक से काम न करना या बार बार भूलना, जोड़ों में दर्द और थकान जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.

इन हेल्दी ऑप्शन को करें ट्राई

अगर किसी को सीलिएक डिजीज की पुष्टि हो जाती है, तो उसका सबसे असरदार इलाज है पूरी जिंदगी ग्लूटेन फ्री डाइट अपनाना. ऐसे लोग चावल, बाजरा, ज्वार, क्विनोआ, कुट्टू और मक्का जैसे नेचुरली ग्लूटेनफ्री अनाज खा सकते हैं. इसके अलावा दालें, बीन्स, फल, सब्जियां, मेवे, बीज, दूध से बनी चीजें, अंडे और ताजा मांस या मछली भी नेचुरली ग्लूटेन फ्री होते हैं और शरीर को जरूरी पोषण देते हैं.

हालांकि, एक बात याद रखना जरूरी है कि हर पैकेट पर लिखा ग्लूटेन फ्री खाना हेल्दी हो, ऐसा जरूरी नहीं है. कई पैक्ड ग्लूटेन फ्री प्रोडक्ट्स में चीनी, अनहेल्दी फैट और नमक ज्यादा हो सकता है, जबकि फाइबर कम हो सकता है. इसलिए जितना हो सके ताजा और नेचुरली ग्लूटेनफ्री खाने की चीजें चुनना बेहतर रहता है.

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