
लखनऊ। गुरुशिष्य परंपरा का प्रतीक गुरु पूर्णिमा पर्व बुधवार को पूरे उत्तर प्रदेश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। तीर्थराज प्रयागराज, आध्यात्मिक नगरी वाराणसी, भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट समेत प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धालुओं ने अपने गुरुओं का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आश्रमों, मठों और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। कई स्थानों पर शिष्य गुरु सेवा, भजनकीर्तन और लंगर प्रसाद जैसे धार्मिक कार्यों में शामिल हुए।
व्यास पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है पर्व
आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को मनाए जाने वाले गुरु पूर्णिमा पर्व को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। इस दिन श्रद्धालु अपने गुरु का पूजन करते हैं, उनके चरणों का वंदन करते हैं और जीवन में ज्ञान व मार्गदर्शन के लिए आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
प्रयागराज संगम पर उमड़े श्रद्धालु
प्रयागराज में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सुबह से ही गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। ब्रह्म मुहूर्त से ही लोगों ने त्रिवेणी में स्नान कर दानपुण्य किया और परिवार की सुखशांति व समृद्धि की कामना की। संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद मंदिरों में दर्शन किए और अपने गुरुओं का आशीर्वाद लिया। पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक और भक्तिमय वातावरण देखने को मिला।
काशी में संतों के दर्शन को पहुंचे शिष्य
वाराणसी में भी गुरु पूर्णिमा पर संतों और गुरुओं के दर्शन के लिए शिष्यों का तांता लगा रहा। बाबा विश्वनाथ धाम और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई है। श्रावण मास की शुरुआत को देखते हुए कांवड़ियों ने भी काशी में पहुंचना शुरू कर दिया है। गंगा घाटों पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
आश्रमों में हवनपूजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम
गायत्री पीठ के संस्थापक श्रीराम शर्मा से जुड़े विभिन्न आश्रमों में सुबह से हवन और पूजन कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके बाद गुरु वचनों को प्रवचन के माध्यम से शिष्यों तक पहुंचाया गया। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। चित्रकूट स्थित संत रामभद्राचार्य के आश्रम में भी बड़ी संख्या में शिष्य पहुंचे। हालांकि स्वामी रामभद्राचार्य के एकांतवास में होने के कारण श्रद्धालुओं को प्रत्यक्ष दर्शन नहीं मिल सके।
घरों में भी श्रद्धा से मनाया गया पर्व
प्रदेश के कई ऐसे श्रद्धालु जो किसी कारणवश गुरु सेवा में उपस्थित नहीं हो सके, उन्होंने अपने घरों में ही गुरु की तस्वीर के सामने फल, मिठाई और अन्य सामग्री अर्पित कर श्रद्धा प्रकट की और गुरु का आशीर्वाद मांगा। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उत्तर प्रदेश में गुरुशिष्य परंपरा, आध्यात्मिक संस्कृति और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला।