
Pakistan ISI: पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI की तरफ से चलाए जा रहे Operation Ground Wire नाम के एक डिजिटल इन्फ्लूएंस नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है. ISI ने ‘Bharat Bytes News’ (BBN) नाम से एक नकली न्यूज पोर्टल/वेबसाइट तैयार की थी, जिसका मकसद भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाना था.
इस नेटवर्क के जरिए भारत के बेरोजगार युवाओं को नौकरी का लालच देकर और लगभग 40,000 रुपये प्रति माह तक की सैलरी देकर रिपोर्टर/कंटेंट राइटर के रूप में भर्ती किया जा रहा था.
फेक न्यूज फैलाने के लिए हो रहा था युवाओं का इस्तेमाल
भर्ती किए गए युवाओं का इस्तेमाल भारत के संवेदनशील मामलों, धार्मिक/सामाजिक मुद्दों और सरकार के खिलाफ भड़काऊ व भ्रामक खबरें बनाने और फैलाने के लिए किया जाता था. पाकिस्तानी हैंडलर्स भारतीय युवाओं से टेलीग्राम और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए संपर्क करते थे और खुद को भारतीय मीडिया ग्रुप का प्रतिनिधि बताते थे. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इस खुलासे के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और साइबर सेल को सतर्क किया गया है, ताकि इस तरह के फर्जी न्यूज पोर्टल्स और विदेशी डिजिटल एजेंट्स पर लगाम कसी जा सके.
जिन लोगों ने दिलचस्पी दिखाई, उनसे बाद में भारतीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करके WhatsApp पर संपर्क किया गया। जांच के मुताबिक, इनमें से कुछ नंबर कथित तौर पर नकली कागजात का इस्तेमाल करके हासिल किए गए थे. भर्ती मौजूदा साथियों के नेटवर्क के जरिए भी की गई, जिससे रेफरल के जरिए यह ऑपरेशन फैल सका.
भर्ती किए गए लोगों में से ज्यादातर 22-26 साल की उम्र के थे. उन्हें कथित तौर पर कंटेंट बनाने और उसे फैलाने के बदले हर महीने लगभग 30,000 से 40,000 रुपये देने का ऑफर दिया गया था.
इंटरव्यू करने के मिले थे आदेश
काम सिर्फ रोजमर्रा की रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं था. युवाओं को कथित तौर पर राजनीतिक और सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील विषयों पर लोगों की राय जानने के लिए इंटरव्यू करने के निर्देश दिए गए थे. इन विषयों में भ्रष्टाचार के आरोप, प्रेस की आजादी, गरीबी, मस्जिद गिराने की घटनाएं और विरोध-प्रदर्शन शामिल थे.
जांच में संवेदनशील सुरक्षा और राजनीतिक मुद्दों से जुड़े काम भी सामने आए, जिनमें पहलगाम आतंकी हमला, ऑपरेशन सिंदूर, राफेल विमानों के कथित क्रैश और अयोध्या चंदा विवाद शामिल थे.
नकली नामों का करते थे इस्तेमाल
जांच के मुताबिक, इस ऑपरेशन में अब्दुल्ला शाद नाम का एक रिक्रूटर है, जो कथित तौर पर ‘नवीन दुबे’ और ‘हर्ष’ जैसे नकली नामों का इस्तेमाल करता है. बताया जाता है कि उसे पाकिस्तान सेना के एक अधिकारी, लेफ्टिनेंट कर्नल जिया (जिन्हें GSO-1 बताया गया है) कंट्रोल करता है. जांच में पता चला कि शाद ने अलग-अलग समय पर खुद को नोएडा, ऑस्ट्रेलिया या अमेरिका जैसी जगहों पर बताया. ऑपरेशन से जुड़े पैसों के लेन-देन का तरीका भी इसी तरह बिखरा हुआ था. कथित तौर पर भुगतान क्रिप्टोकरेंसी, कई बैंक खातों और अलग-अलग UPI हैंडल के जरिए किए जाते थे, जिसमें बिचौलिए पैसे को बदलकर भारतीय सहयोगियों तक पहुंचाते थे.
जांच में पाया गया कि उत्तर प्रदेश के दो सहयोगियों को कुल मिलाकर लगभग 4.5 लाख रुपये मिले, जो कथित तौर पर रिपोर्टिंग का काम करने और जूनियर टीमों को संभालने के लिए दिए गए थे. इसलिए, इस कथित मॉडल में कई स्तर शामिल थे, जैसे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर, भारतीय रिक्रूटर, स्थानीय सहयोगी और वित्तीय बिचौलिए, ताकि ऑपरेशन का पता लगाना मुश्किल हो जाए.