ITI संस्थान :  4 हजार रुपये लेकर परीक्षा में नकल करा रहे थे प्रिंसिपल, 5 सॉल्वर समेत 11 लोग गिरफ्तार

ITI संस्थान :  4 हजार रुपये लेकर परीक्षा में नकल करा रहे थे प्रिंसिपल, 5 सॉल्वर समेत 11 लोग गिरफ्तार
ITI संस्थान :  4 हजार रुपये लेकर परीक्षा में नकल करा रहे थे प्रिंसिपल, 5 सॉल्वर समेत 11 लोग गिरफ्तार

लखनऊ/प्रयागराज : शिक्षा में सुधार की ढेरों कोशिशें आज भी नाकाम साबित हो रही हैं, आये दिन नकल माफिया पकड़े जाते हैं, बावजूद इसके व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है।

ताजा मामला प्रयागराज के नैनी से जुड़ा हुआ है। यहां स्थित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में 4 हजार रुपये पर नकल कराई जा रही थी। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। जिसका खुलासा स्पेशल टॉस्क फोर्स ने किया है। नकल का यह पूरा खेल संस्थान के प्रिंसिपल और अनुदेशकों द्वारा किया जा रहा था। एसटीएफ ने प्रिंसिपल समेत 11 लोगों को नकल कराने के आरोप में धर दबोचा है।

एसटीएफ ने इन लोगों को पकड़ा

शिवम कुमार, रणविजय सिंह, जय सिंह, जितेंद्र पटेल, दिलीप कुमार पटेल असल परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दे रहे थे। यह सॉल्वर गैंगे के सक्रिय सदस्य बताये जा रहे हैं। इसके अलावा संस्था के प्रिंसिपल अशोक कुमार, रविप्रकाश परीक्षा प्रभारी, अनुदेशक फूल प्रकाश, अनुदेशक धीरज कुमार शर्मा, अनुदेशक राजेश कुमार, अनुदेशक राजकुमार मौर्या को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है।

आपस में बांट लेते थे रुपये

STF की पूछताछ में आरोपित अनुदेशक रवि प्रकाश ने बताया कि प्रिंसिपल अशोक कुमार ने उसे परीक्षा प्रभारी नियुक्त किया था, अखिल भारतीय व्यावसायिक सीबीटी 2026 परीक्षा में परीक्षार्थिंयों से 4000 रुपये लिये जाते हैं, उनकी जगह पर सॉल्वर बैठकर  परीक्षा दिलाई जाती हैं, इस काम में धीरन्जन कुमार परीक्षार्थियों से संपर्क करते थे, वही पैसा तय करते थे, धीरन्जन पूर्व में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में बतौर अनुदेशक तैनात रहे हैं, मौजूदा समय में वह बांदा में तैनात हैं। धीरन्जन की तरफ से पूरा मामला तय होने पर पूरा पैसा अनुदेशक फूल प्रकाश और राजकुमार मोर्या वसूलते थे, जिसे परीक्षा समाप्त होने के बाद सभी आरोपित आपस में बांट लेते थे।

सॉल्वर को मिलते थे पांच सौ रुपये

सॉल्वर शिवम ने बताया कि उसके साथ रणविजय, जय सिंह, जितेंद्र पटेल, दिलीप कुमार पटेल धीरन्जन के बुलाने पर आते थे, जिस परीक्षार्थी की जगह उन्हें परीक्षा देना होता था उसका प्रवेश पत्र की छाया प्रति मिल जाती थी, अलग कमरे में बैठकर वह परीक्षा देते थे। इसके एवज में हमें 500500 रुपये मिलते थे।

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