
रामपुर, अमृत विचार। जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों पर प्रस्तावित कार्रवाई के बीच अब विश्वविद्यालय तक जाने वाली करीब 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क भी चर्चा में आ गई है। लोक निर्माण विभाग ने बुधवार को सड़क पर अपना बोर्ड लगाकर स्पष्ट किया कि “यह आम रास्ता है।” विभाग की इस कार्रवाई को सरकारी सड़क पर अपना अधिकार स्थापित करने के रूप में देखा जा रहा है।
लंबे समय से विवादों में रही सड़क
समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में बनी यह सड़क पिछले कई वर्षों से विवादों में रही है। सड़क के एक ओर आरसीसी बाउंड्रीवाल बनाए जाने के कारण किसानों के खेतों और आसपास के लोगों के घरों तक पहुंच प्रभावित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप रहा कि वे इस रास्ते का स्वतंत्र रूप से उपयोग नहीं कर पा रहे थे।
मुलायम सरकार में हुआ था निर्माण, बाद में हुआ चौड़ीकरण
जानकारी के अनुसार, इस सड़क का निर्माण वर्ष 200304 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में कराया गया था। इसके बाद वर्ष 2016 में त्वरित आर्थिक विकास योजना के तहत सड़क के चौड़ीकरण के लिए करीब 17 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ, जिसमें 13 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से सड़क का चौड़ीकरण कराया गया।
2019 की जांच रिपोर्ट में उठे थे सवाल
वर्ष 2019 में तत्कालीन जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह द्वारा गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में सड़क के उपयोग को लेकर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि सरकारी धन से बनी सड़क का उपयोग आम जनता के बजाय विश्वविद्यालय के नियंत्रण में हो रहा है। जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी, लेकिन इसके बाद लंबे समय तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
पीडब्ल्यूडी की कार्रवाई से फिर गरमाया मामला
अब पीडब्ल्यूडी द्वारा सड़क पर बोर्ड लगाकर इसे सार्वजनिक मार्ग घोषित किए जाने के बाद मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इसे सरकारी सड़क को कब्जामुक्त कराने और आम लोगों के आवागमन के अधिकार को सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।