Petrol Pump Secrets: मशीन में ‘0’ देखने के बाद भी पेट्रोल कम मिला? पंप वालों का ये ‘सीक्रेट राज’ जानकर उड़ जाएंगे आपके होश

Petrol Pump Secrets: मशीन में ‘0’ देखने के बाद भी पेट्रोल कम मिला? पंप वालों का ये ‘सीक्रेट राज’ जानकर उड़ जाएंगे आपके होश
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आप जब भी गाड़ी में पेट्रोल या डीजल भरवाने जाते हैं, तो सबसे पहले मशीन पर ‘0’ की रीडिंग चेक करते हैं, ताकि पुरानी रीडिंग न जुड़ जाए। लेकिन ठग पंप वाले इसी भरोसे का फायदा उठा रहे हैं। कई ड्राइवरों ने शिकायत की है कि पैसे तो पूरे चुकाने पड़ते हैं, लेकिन टैंक में उतना फ्यूल नहीं आता। यह ट्रिक इतनी चालाकी भरी है कि आम आदमी आसानी से फंस जाता है, और नतीजा? ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। आपकी मेहनत की कमाई बर्बाद हो जाती है।

क्या है यह ‘जंप ट्रिक’ का राज?

सामान्यत: पेट्रोल मशीन ‘0’ पर सेट होती है, लेकिन जैसे ही नोजल दबाते हैं, मीटर अचानक 5, 10 या 20 रुपये पर कूद जाता है। ऊपर बताई गई जानकारी के मुताबिक, यह जंप शुरुआती 100-200 मिलीलीटर फ्यूल को छिपा देता है, लेकिन बिल में पूरा पैसा जोड़ दिया जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स और अन्य स्रोतों से पता चलता है कि यह ट्रिक मीटर के सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर में हेरफेर से की जाती है।

पंप कर्मचारी नोजल को तेजी से चालू-बंद करते हैं, ताकि फ्यूल कम जाए लेकिन डिजिटल काउंटर तेज दौड़े। एक ग्राहक ने बताया, “मैंने 500 रुपये का पेट्रोल लिया, लेकिन गाड़ी का गेज आधा भी नहीं भरा। मीटर 0 से सीधे 15 पर पहुंच गया था।”

यह ट्रिक कैसे काम करती है?

पेट्रोल पंप की मशीनें वॉल्यूमेट्रिक तरीके से फ्यूल मापती हैं, यानी लीटर के हिसाब से। सामान्य रीडिंग में 1 लीटर फ्यूल पर मीटर 1-2 पैसे प्रति मिलीलीटर बढ़ता है, लेकिन जंप ट्रिक में कैलिब्रेशन गड़बड़ कर दिया जाता है। मशीन पहले 50-100 एमएल हवा या कम डेंसिटी वाला मिश्रण भरती है, जो वजन कम रखता है। फिर मीटर ‘जंप’ कर 10-20 रुपये दिखाता है।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह 5-10% चोरी का कारण बनता है। राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में ऐसे कई मामले पकड़े गए, जहां रोजाना लाखों रुपये की ठगी हो रही थी। एक वीडियो में कर्मचारी कार्ड पर एक्स्ट्रा अमाउंट एंटर करता दिखा, जो ग्राहक ने रंगे हाथ पकड़ लिया।

इसके अलावा, डेंसिटी मीटर इग्नोर न करें

पेट्रोल की डेंसिटी 0.70-0.78 के बीच होनी चाहिए। अगर कम दिखे, तो पानी या केमिकल मिला हो सकता है, जो इंजन खराब करता है। पुरानी खबरों में चिप फ्रॉड सामने आया, जहां मीटर में छिपी डिवाइस हर लीटर पर 50-100 एमएल कम देती थी। 2017 की रिपोर्ट में ऐसे पंप पकड़े गए, जिनसे करोड़ों की चोरी हो रही थी। मशीन कैलिब्रेशन गड़बड़ी भी आम है – सही रीडिंग में हल्का जंप (4-5 रुपये) ठीक है, लेकिन 10 से ज्यादा संदिग्ध।

ग्राहक क्या करें?

सबसे पहले ‘0’ चेक करने के बाद नोजल दबाते ही मीटर वॉच करें। धीरे-धीरे बढ़े, तो ठीक; जंप हो, तो रोकें। फुल टैंक न भरें, 200-500 एमएल लें। पेमेंट से पहले बिल प्रिंट लें, कार्ड स्वाइप पर अमाउंट चेक करें। डेंसिटी नोट करें। शक हो, तो पंप का लाइसेंस नंबर (हर मशीन पर लिखा) फोटो खींचें। शिकायत के लिए वजन-माप विभाग, पुलिस या हेल्पलाइन 1800-11-5515 पर कॉल करें। भारत में सालाना हजारों केस दर्ज होते हैं, लेकिन सतर्कता से 90% ठगी रुक सकती है।

सरकार सख्ती बता रही, लेकिन जागरूकता जरूरी। अगली बार पंप जाएं, तो आंखें खुली रखें- वरना ‘0’ आपका जीरो बर्दाश्त न करेगा।

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