
अमृत विचार : उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि राज्य की गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम चल रहा है। गौवंश के गोबरगोमूत्र से खाद, कंडे, दीपक और बायोगैस तैयार की जाएगी। इसी आमदनी से गौशालाओं में पशुओं के चारेखाने का इंतजाम होगा। कैबिनेट मंत्री ने बरसात में जलभराव वाली गौशालाओं में चबूतरे बनवाने, हरे चारे की उपलब्धता और गोचर भूमि में चारा बोने पर जोर दिया है। बरेली विकास भवन में अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने यह निर्देश दिए हैं।
पशुधन मंत्री ने पशुओं को छोड़ने वालों पर कार्रवाई, एफएमडी टीकाकरण और जलभराव दूर कराने के निर्देश दिए। कृषि के साथ पशुपालन पर जोर देते हुए उन्होंने साहीवाल व गंगातीरी नस्ल के सीमन की उपलब्धता ओर सेक्ससॉर्टेड सीमन की कीमत घटाए जाने की जानकारी दी। बैठक में जनप्रतिनिधियों ने बाउंड्रीवाल, नंदी गौशाला, चारा उत्पादन, खाद और सीबीजी प्लांट जैसे सुझाव रखे।
मेयर डा. उमेश गौतम, एमएलसी कुंवर महाराज सिंह, विधायक संजीव अग्रवाल, डॉ. एमपी आर्य, डॉ. राघवेन्द्र शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष आंवला आदेश प्रताप सिंह, अधिकारियों में मंडलायुक्त शंभू कुमार, चारों जिलों के सीडीओ, एसपी सिटी मानुष पारीक, अपर निदेशक पशुपालन, चारों जनपद के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, डीसी मनरेगा सहित अन्य विभागों के समस्त अधिकारी उपस्थित रहे।
मंडल में गौशालाओं की स्थिति बताई
अधिकारियों ने बताया कि शाहजहांपुर में 145 गौशालाओं में 52 हेक्टेयर में हरा चारा बोया गया है। पीलीभीत में 66 गौशालाओं में 8,259 गोवंश संरक्षित हैं और 53 हेक्टेयर में हरा चारा तैयार किया गया है। बेनीपुर गौशाला में गोबर से पंचगव्य बनाकर बेचा जा रहा है। बदायूं में 223 गौशालाओं में 36,886 गोवंश संरक्षित हैं, जबकि चार गौशालाएं निर्माणाधीन हैं। वहां अतिरिक्त शेड के लिए स्थानों को चिह्नित किया गया है। 136 हेक्टेयर क्षेत्र में हरा चारा बोया गया है और सोलर लाइट की व्यवस्था कराई जा रही है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। बरेली में 106 गौशालाओं में 16,361 गोवंश संरक्षित हैं। विकास भवन में गौशालाओं की निगरानी के लिए सीसीटीवी कंट्रोल रूम भी बनाया जा रहा है।
सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्ती
पशुधन विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल को पूरी तरह बंद करने के कड़े निर्देश दिए। कहा कि प्लास्टिक भूमि के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है, जिससे फसलों की पैदावार बुरी तरह प्रभावित हो रही है। गौवंश इस प्लास्टिक को खाते हैं, तो यह उनके लिए प्राणघातक साबित होती है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे क्षेत्र पंचायत की बैठकों में शामिल हों और ग्रामीणों को जागरूक करें कि पर्यावरण और पशु सुरक्षा के लिए प्लास्टिक का प्रयोग न करें।
इंसेट
जनप्रतिनिधियों ने दिए सुझाव
महापौर डॉ. उमेश गौतम ने बताया कि निगम की गौशालाओं में खाद तैयार कर ग्रामीण क्षेत्रों में भेजी जा रही है। सीबीजी प्लांट लगाने की तैयारी भी है। 600 पशुओं की क्षमता वाली नंदी गौशाला लगभग तैयार है। एमएलसी कुंवर महाराज सिंह ने बछिया के जन्म को बढ़ावा देने वाले सीमन के उपयोग व बछड़ों के बधियाकरण की बात कही।
विधायक राघवेंद्र शर्मा ने रामगंगा किनारे खाली पड़ी जमीन पर चारा उत्पादन और गौशाला स्थापित करने का सुझाव दिया। डा. एमपी आर्य ने ग्राम समाज की भूमि पर नेपियर घास उगाने, गोबर से खाद बनाने और गोबर गैस संयंत्र लगाने की बात कही। संजीव अग्रवाल ने गोशालाओं की सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवाल और सोलर लाइट पर जोर दिया।
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