Quick Samachar: Parenting Tips: आज के अत्यधिक प्रतिस्पर्धी युग में हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा सर्वगुण संपन्न हो। पढ़ाई हो या खेलकूद नंबर वन आने की इस होड़ ने पैरेंटिंग के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। अक्सर अपनी संतान को सर्वश्रेष्ठ बनाने के चक्कर में माता-पिता अनजाने में उन पर इतना मानसिक दबाव डाल देते हैं कि उनका स्वाभाविक विकास रुक जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि परफेक्ट पैरेंट बनने की यह जिद बच्चों को मानसिक और भावनात्मक रूप से कमजोर बना रही है।

कहीं आप तो नहीं बन रहे ओवर कंट्रोलिंग पैरेंट? जानें बच्चों से डील करने का सबसे बेस्ट तरीका
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कंट्रोल और केयर के बीच का अंतर

अक्सर माता-पिता बच्चों की हर गतिविधि जैसे वे किससे बात कर रहे हैं क्या पहन रहे हैं या क्या खेल रहे हैं पर कड़ी नजर रखने लगते हैं। इसे वे अपनी केयर समझते हैं लेकिन वास्तव में यह कंट्रोल होता है। जब बच्चों को अपनी पसंद का छोटा सा फैसला लेने की आजादी भी नहीं मिलती तो धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास कम होने लगता है। ऐसे बच्चे भविष्य में हर छोटे-बड़े निर्णय के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाते हैं।

गलतियों से सीखने का अवसर

एक के लिए गलतियां करना और उनसे सीखना अनिवार्य है। यदि माता-पिता बच्चों के लिए हर रास्ता पहले से ही साफ कर देंगे तो बच्चा मुश्किलों का सामना करना कभी नहीं सीख पाएगा। बच्चों को यह समझने का मौका दें कि असफलता जीवन का अंत नहीं बल्कि सीखने की एक प्रक्रिया है। अत्यधिक हस्तक्षेप बच्चों की रचनात्मकता और सोचने की क्षमता को कुंद कर देता है।

भरोसा है जरूरी

किसी भी रिश्ते की तरह माता-पिता और बच्चे के बीच भरोसा सबसे महत्वपूर्ण है। जब बच्चों पर हर बात के लिए रोक-टोक की जाती है तो वे विद्रोही होने लगते हैं या बातें छुपाने लगते हैं। इसके बजाय उनके साथ एक दोस्त जैसा व्यवहार करें। दिनभर की बातें साझा करने का माहौल बनाएं। जब बच्चों को लगता है कि उनकी बात सुनी और समझी जा रही है तो वे आपसे कुछ भी छुपाने की जरूरत महसूस नहीं करते।

उम्मीदों का बोझ और बच्चे की क्षमता

हर बच्चा अपनी एक विशिष्ट प्रतिभा के साथ जन्म लेता है। यह जरूरी नहीं कि यदि एक बच्चा पढ़ाई में अच्छा है तो दूसरा भी वैसा ही हो। माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चे की रुचि और क्षमता को पहचानें। अपनी अधूरी इच्छाओं का बोझ बच्चों के कंधों पर लादना उनकी मासूमियत और प्रतिभा के साथ अन्याय है।

अपनी गलती स्वीकारें

कोई गणित का फॉर्मूला नहीं है जिसमें गलती न हो। यदि कभी आप बच्चे पर बेवजह चिल्ला दें या आपसे कोई गलती हो जाए तो उनसे माफी मांगें। यह व्यवहार बच्चे को सिखाता है कि कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता और अपनी गलती मानना कमजोरी नहीं बल्कि एक महान गुण है।

एक अच्छा माता-पिता होने का मतलब यह नहीं है कि आपका बच्चा कभी गलती न करे बल्कि यह है कि जब वह गलती करे तो आप उसे सहारा देने के लिए वहां मौजूद हों। बच्चों को कंट्रोल करने के बजाय उन्हें गाइड करें ताकि वे एक मजबूत और स्वतंत्र व्यक्तित्व के रूप में उभर सकें।