दुनिया का सबसे छोटा ‘ज्वालामुखी’, जिसके अंदर सीढ़ियों से उतरते हैं..

दुनिया का सबसे छोटा ‘ज्वालामुखी’, जिसके अंदर सीढ़ियों से उतरते हैं..
Featured Image

दुनिया में ऐसे कई प्राकृतिक अजूबे हैं, जो वैज्ञानिकों को हैरान करते हैं और पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं. ऐसा ही एक अनोखा और रूह कंपा देने वाला ढांचा मेक्सिको के प्यूब्ला शहर के ला लिबर्टाड इलाके में स्थित है, जिसे स्थानीय लोग सदियों से दुनिया का सबसे छोटा ज्वालामुखी कहते आ रहे हैं. इस ऐतिहासिक और रहस्यमयी प्राकृतिक बनावट का नाम है ‘कुएक्सकोमेट’ (Cuexcomate). यह दुनिया की इकलौती ऐसी जगह है, जहां लोग इस सोए हुए ज्वालामुखी के ऊपर चढ़कर लोहे की घुमावदार सीढ़ियों के सहारे इसके पाताल जैसे गहरे और खोखली खाई के अंदर उतर सकते हैं. वैज्ञानिकों और भूवैज्ञानिकों के अनुसार, कुएक्सकोमेट असल में कोई सक्रिय या मृत ज्वालामुखी नहीं है, बल्कि यह एक बुझा हुआ गीजर (जमीन के अंदर से निकलने वाला गर्म पानी का झरना) या एक ‘मिट्टी का ज्वालामुखी’ है.

स्थानीय नहुआतल भाषा में ‘कुएक्सकोमेट’ शब्द का अर्थ ही मिट्टी का मटका होता है. माना जाता है कि इसका निर्माण साल 1064 में मेक्सिको के दूसरे सबसे ऊंचे और सक्रिय ज्वालामुखी ‘पोपोकाटेपेटल’ के एक भयंकर विस्फोट के दौरान हुआ था. उस भीषण ज्वालामुखी विस्फोट के कारण जमीन के अंदर मौजूद भू-तापीय झरने सक्रिय हो गए और वे चूना पत्थर की परतों को चीरते हुए भारी दबाव के साथ बाहर आए. इस प्रक्रिया में जमे कैल्साइट और सिलिकेट के मलबे ने धीरे-धीरे एक विशाल ढेर का रूप ले लिया. आज यह ढांचा 43 फीट ऊंचा और 75 फीट चौड़ा है, जो दिखने में बिल्कुल किसी छोटे ज्वालामुखी के शंकु जैसा प्रतीत होता है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। यह भीतर से पूरी तरह खोखला है और इसके शीर्ष पर 23 फीट चौड़ा एक बड़ा मुहाना है. टूरिस्ट्स की सुविधा के लिए अब इसमें एक घुमावदार धातु की सीढ़ी लगाई गई है, जिसके जरिए लोग इसके अंदर आसानी से उतरकर अद्भुत नजारा देख सकते हैं.

नरबलि का खौफनाक इतिहास
कुएक्सकोमेट का इतिहास जितना वैज्ञानिक रूप से दिलचस्प है, उतना ही सामाजिक और ऐतिहासिक रूप से डरावना भी रहा है. इसके बाहर साल 1970 में लगाए गए एक शिलालेख पर साल 1585 के एक इतिहासकार का कथन लिखा है. उन्होंने इसे एक विशाल अकेले खड़े पत्थर के रूप में वर्णित किया था, जिसके शिखर पर एक बहुत बड़ा मुंह है, मानो कोई गहरा कुआं हो और जिसके तल में बेहद दुर्गंधयुक्त पानी भरा हुआ था. इस शिलालेख से यह भी पता चलता है कि प्राचीन काल में स्थानीय स्वदेशी जनजातियों द्वारा अपने देवताओं को खुश करने के लिए इस खोखले ढांचे के अंदर इंसानों की बलि दी जाती थी. इतना ही नहीं, बाद के दौर में समाज द्वारा तिरस्कृत और आत्महत्या करने वाले लोगों के शवों को भी इसी गहरे गड्ढे में फेंक दिया जाता था, क्योंकि उस समय के समाज का मानना था कि आत्महत्या करने वाले लोग शोक या पारंपरिक दफ़न के हकदार नहीं हैं.

इन खौफनाक और रूह कंपा देने वाले हादसों के कारण ही इस गीजर के आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों को कभी-कभी बेहद खौफनाक नाम “शैतान की नाभि की संतानें” (Children of the Devil’s Navel) कहकर पुकारा जाता था. एक समय था जब यह सुनसान इलाके में दूर से दिखने वाली इकलौती ऐतिहासिक पहचान थी, लेकिन आज इसके चारों तरफ आधुनिक शहरी विकास हो चुका है. इसके बावजूद, अपने इसी डरावने इतिहास, अनोखी बनावट और रोमांचक अनुभव के कारण कुएक्सकोमेट आज भी मेक्सिको के प्यूब्ला शहर का सबसे पसंदीदा और लोकप्रिय पर्यटन स्थल बना हुआ है, जहां हर साल हजारों सैलानी ज्वालामुखी की गहराई में उतरने का अनूठा रोमांच महसूस करने आते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *