मुंबईबेंगलुरु में किरायेदारों की बढ़ी मुश्किलें! लाखों करोड़ रुपये डिपॉजिट में फंसे

मुंबईबेंगलुरु में किरायेदारों की बढ़ी मुश्किलें! लाखों करोड़ रुपये डिपॉजिट में फंसे

देश के बड़े शहरों में किराए पर घर लेना लगातार महंगा होता जा रहा है. किराया ही नहीं, बल्कि भारीभरकम सिक्योरिटी डिपॉजिट भी किरायेदारों की जेब पर बड़ा बोझ डाल रहा है. प्रॉपटेक कंपनी NoBroker की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के छह प्रमुख महानगरों मुंबई महानगर क्षेत्र , बेंगलुरु, दिल्लीएनसीआर, चेन्नई, हैदराबाद और पुणे में किरायेदारों के करीब ₹1.26 लाख करोड़ मकान मालिकों के पास सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में फंसे हुए हैं.

मुंबईबेंगलुरु में किरायेदारों की बढ़ी मुश्किलें! लाखों करोड़ रुपये डिपॉजिट में फंसे

रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा सिक्योरिटी डिपॉजिट मुंबई में ₹41,156 करोड़ और बेंगलुरु में ₹31,628 करोड़ का है. इससे साफ है कि इन शहरों में घर किराए पर लेने के लिए लोगों को बड़ी रकम पहले से जमा करनी पड़ती है.

ज्यादा सिक्योरिटी डिपॉजिट बन रहा बड़ी परेशानी

रिपोर्ट में सामने आया कि बेंगलुरु के 75% किरायेदारों ने माना कि अधिक सिक्योरिटी डिपॉजिट की वजह से वे कभी न कभी अपनी पसंद का घर नहीं ले पाए. यानी कई लोगों के लिए घर चुनने में किराया नहीं, बल्कि शुरुआती डिपॉजिट सबसे बड़ी बाधा बन गया है.

वहीं, दिल्लीएनसीआर में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही. यहां 58% किरायेदारों को लीज खत्म होने के बाद उनका पूरा सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस मिल गया. हालांकि करीब 30% लोगों के डिपॉजिट से कुछ राशि काट ली गई, जबकि 12% किरायेदारों को डिपॉजिट वापसी को लेकर विवाद का सामना करना पड़ा.

किराया खा रहा है कमाई का बड़ा हिस्सा

रिपोर्ट बताती है कि शहरों में रहने वाले अधिकांश लोगों के मासिक बजट में किराया सबसे बड़ा खर्च बन चुका है. करीब आधे किरायेदार अपनी मासिक आय का 30% से अधिक हिस्सा सिर्फ किराए में खर्च कर रहे हैं.

मुंबई में हालात सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण हैं. यहां 25% किरायेदार अपनी आधे से ज्यादा आय किराए पर खर्च करते हैं, जबकि करीब 15% लोग अपनी आय का 41% से 50% तक हिस्सा किराए में दे रहे हैं. यानी मुंबई में हर 10 में से लगभग 4 किरायेदार अपनी कमाई का 40% से ज्यादा हिस्सा सिर्फ मकान किराए पर खर्च कर रहे हैं.

घर खरीदने से ज्यादा आसान हो गया किराए पर रहना

रिपोर्ट के मुताबिक, अब घर खरीदना पहले की तुलना में और महंगा हो गया है. लगभग सभी बड़े शहरों में 30 साल के होम लोन की मासिक EMI, उसी घर के किराए से काफी ज्यादा है. यही वजह है कि कई लोग चाहकर भी अपना घर नहीं खरीद पा रहे और लंबे समय तक किराए के मकान में रहने को मजबूर हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतें और महंगे होम लोन शहरी भारत में “फोर्स्ड टेनेंसी” यानी मजबूरी में किराए पर रहने की प्रवृत्ति को बढ़ा रहे हैं.

छोटे फ्लैट निवेशकों के लिए ज्यादा फायदे का सौदा

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि निवेश के लिहाज से 1BHK और स्टूडियो अपार्टमेंट सबसे बेहतर विकल्प बनकर उभरे हैं. इनसे बड़े फ्लैटों की तुलना में ज्यादा रेंटल यील्ड मिल रही है.बेंगलुरु में 4.8% और हैदराबाद में 4.6% का रेंटल यील्ड दर्ज किया गया, जो प्रमुख शहरों में सबसे अधिक है. वहीं 4BHK जैसे बड़े फ्लैटों में रेंटल यील्ड 3% से भी कम रह जाती है.

रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ते किराए, ऊंचे सिक्योरिटी डिपॉजिट और महंगी प्रॉपर्टी के कारण शहरी भारत का हाउसिंग मार्केट तेजी से बदल रहा है. ऐसे में किरायेदारों और निवेशकों, दोनों के लिए सोचसमझकर फैसला लेना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है.

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