Quick Samachar: भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनियों में शामिल जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा दिया है. कंपनी ने आईपीओ के लिए ड्राफ्ट दस्तावेज दाखिल कर दिए हैं. दस्तावेज के अनुसार, जियो आईपीओ से जुटाई जाने वाली राशि का बड़ा हिस्सा अपनी टेलीकॉम इकाई के विदेशी कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल करेगी. इससे कंपनी का कर्ज बोझ कम होगा और भविष्य की विकास योजनाओं को गति मिलेगी.

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275 अरब रुपये कर्ज चुकाने में होंगे खर्च

ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ से मिलने वाली रकम में से 275 अरब रुपये का इस्तेमाल मौजूदा कर्ज चुकाने के लिए करेगी. हालांकि कंपनी ने अभी आईपीओ के कुल आकार का खुलासा नहीं किया है, लेकिन दस्तावेज में यह साफ किया गया है कि कर्ज कम करना कंपनी की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है.

जियो इस आईपीओ के जरिए 27 करोड़ तक नए शेयर जारी कर सकती है. माना जा रहा है कि यह भारत के सबसे बड़े आईपीओ में से एक हो सकता है.

विदेशी बैंकों से लिया गया है कर्ज

जियो की टेलीकॉम इकाई रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के पास विदेशी वाणिज्यिक उधारी के तहत तीन बड़े कर्ज हैं. इनकी कुल राशि 300.6 अरब रुपये है. यह कर्ज डॉलर और जापानी येन में लिया गया है.

इन ऋणों के प्रमुख कर्जदाताओं में ऑस्ट्रेलिया एंड न्यूजीलैंड बैंकिंग ग्रुप , बैंक ऑफ अमेरिका, बार्कलेज, बीएनपी परिबा और सिटीबैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय बैंक शामिल हैं. कंपनी ने कहा है कि आईपीओ से मिलने वाली राशि के जरिए इन कर्जों का पूरा या आंशिक भुगतान किया जाएगा.

कर्ज घटने से बढ़ेगी वित्तीय ताकत

कंपनी का कहना है कि कर्ज की समय से पहले अदायगी से उसकी बैलेंस शीट मजबूत होगी. साथ ही ब्याज भुगतान और अन्य वित्तीय खर्चों में भी कमी आएगी. इससे कंपनी का शुद्ध कर्ज घटेगा और भविष्य में जरूरत पड़ने पर पूंजी जुटाना आसान होगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि कम कर्ज वाली कंपनियों को निवेशकों का ज्यादा भरोसा मिलता है, जिससे उनकी बाजार में स्थिति मजबूत होती है.

5G, ब्रॉडबैंड और AI पर रहेगा फोकस

जियो प्लेटफॉर्म्स ने कहा है कि कर्ज कम होने के बाद कंपनी अपनी रणनीतिक परियोजनाओं पर अधिक निवेश कर सकेगी. इनमें 5G नेटवर्क का विस्तार, फिक्स्ड ब्रॉडबैंड सेवाओं की पहुंच बढ़ाना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड सेवाओं का विकास प्रमुख हैं.

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आईपीओ के जरिए कर्ज कम करने की यह रणनीति जियो को भविष्य की तकनीकी प्रतिस्पर्धा के लिए बेहतर स्थिति में खड़ा करेगी. इससे कंपनी के कारोबार को नई गति मिलने की उम्मीद है और निवेशकों को भी दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है.