Quick Samachar: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में एक सरकारी एडेड इंटर कॉलेज से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां इस सरकारी प्रबंधकीय स्कूल में बेटियों की नो इंट्री है। उसका कारण सुनेंगे तो यकीन मानिए आप भी हैरान हो जाएंगे क्योंकि इस स्कूल में बच्चियों के लिए टायलेट नहीं है, जबकि यहां पर आलरेडी बालिका टायलेट बना हुआ। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि स्कूल के ठीक बगल इस स्कूल के प्रबन्धक का दूसरा प्राइवेट इंटर कॉलेज है जहां छात्राओं की संख्या बढ़ाने के लिए सरकारी स्कूल में टायलेट न होने का बहाना बना छात्राओं के दाखिला लेने में टाल मटोल किया जाता है। मामला जिला विद्यालय निरीक्षक में संज्ञान में आने के बाद विद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी कर, छात्राओं के दाखिले के लिए आदेशित कर दिया गया है।

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, ये पूरा मामला कलवारी क्षेत्र में स्थित झिनकू लाल त्रिवेणी राम चौधरी इंटर कॉलेज का है जहां स्कूल में पिछले 6 दशकों से बेटियों के दाखिले पर रोक है। ये कोई सरकारी फरमान नहीं बल्कि प्रबंधक जी के फरमान से हो रहा है। दरअसल प्रबंधक द्वारा स्कूल में महिला शौचालय और विद्यालय में बाउंड्री न होने का हवाला देकर पिछले कई सालों से गरीब बेटियों के दाखिले पर रोक लगा दी गई है, जबकि ऐसा नहीं है, स्कूल में बकायदा बालिका शौचालय है। आरोप है कि प्रबंधक जी ऐसा इसीलिए कर रहे हैं क्योंकि इस सरकारी स्कूल से सटा इनका निजी प्राइवेट इंटर कॉलेज है। इस वजह से बेटियों को सरकारी कॉलेज में पढ़ने से रोककर उनसे मोटी फीस लेने के लिए एडमिशन नहीं लिया जाता।
टायलेट सीट लेकर स्कूल पहुंचा अभिभावक
इस घटना से परेशान एक अभिभावक साइकिल पर टायलेट सीट लेकर स्कूल पहुंच गया और विद्यालय प्रबंधन से कहा कि साहब टायलेट सीट ले लो लेकिन मेरे बेटी का एडमिशन कर लो। अभिभावकों का साफ तौर पर आरोप है कि इस सरकारी स्कूल प्रबंधक के स्कूल के ठीक सटे, उन्हीं प्रबंधक का निजी बालिका इंटर कॉलेज स्कूल है जिसको देखते हुए यहां बच्चियों के दाखिले में टाल मटोल किया जाता है ताकि इनका विद्यालय मोटी कमाई कर सके। आपको यह भी बता दें कि सरकारी एडेड इंटर कॉलेज स्कूल और प्राइवेट स्कूल इन दोनों के प्रबंधक एक ही हैं।
परिजनों ने क्या बताया?
हैरानी की बात यह है कि इस संस्थान को वर्ष 1957 में ही बालकबालिका साथ पढ़ाने की सरकारी मान्यता मिली थी। पहले तो यह स्कूल प्राइवेट था लेकिन बाद में सरकार ने इसे एडेड स्कूल कर दिया जिसके बाद स्कूल के प्रबन्धक ने अपने ही प्रबंधकीय सरकारी एडेड स्कूल से ठीक बगल एक और निजी बालिक इंटर कॉलेज खोल लिया। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अपना निजी स्कूल चलाने की यह एक सोचीसमझी साजिश है। पेरेंट का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन द्वारा सरकारी इंटर कॉलेज में लड़कियों का दाखिला रोककर उन्हें निजी स्कूल में मोटी फीस देने पर मजबूर किया जाता है। जो बेटियां प्राइवेट स्कूल की फीस नहीं भर पातीं, उन्हें बीच में ही पढ़ाई छोड़ने पर विवश होना पड़ रहा है। ऐसा नहीं है कि इस सरकारी स्कूल में बालिका शौचालय नहीं है, स्कूल में बालिका शौचालय भी है, लेकिन प्रबंधक जी का आदेश है तो भला कोई इसे भला कोई कैसे इनकार कर सकता है।
स्थानीय छात्राओं ने बताया कि उनकी कई सहेलियां शिक्षा के लिए प्रबंधन तंत्र की मनमानी के चलते पढ़ाई छोड़ चुकी हैं। अभिभावक भी प्रबंधक के इस फरमान से परेशान होकर खुद की बेटी का सरकारी स्कूल में दाखिला हो जाए इसके लिए बकायदा साइकल पर एक टॉयलेट सीट बांधकर उसे लेकर विद्यालय पहुंच गया और विद्यालय के जिम्मेदारों को टायलेट सीट देकर उसकी बेटी के दाखिला कर लेने की गुहार लगाई लेकिन स्कूल के जिम्मेदारों का दिल नहीं पसीजा। इतना सब करने के बाद भी अभिभावक के हाथ सिर्फ और सिर्फ निराशा ही हाथ लगी।
स्कूल के प्रिंसिपल ने दी सफाई
वहीं, इस पूरे मामले में जब स्कूल के प्रिंसिपल आज्ञाराम चौधरी से बात कि तो उन्होंने सुरक्षा का हवाला देते हुए बताया कि यह सही है कि यहां बालिका शौचालय नहीं है और स्कूल में बाउंड्रीवाल भी नहीं है, इसका मूल कारण बताया,जिस वजह से यहां बच्चियों के दाखिले पर रोक है ऐसा नहीं है कि यहां बच्चियों का दाखिला नहीं हुआ है वर्ष 2021 व 2022 में 60 से 70 लड़कियों का प्रवेश भी दिया गया था लेकिन उसके बाद से ही न कोई बच्ची दाखिला लेने के लिए आया और न किसी ने पढ़ने की इच्छा जाहिर की।
विद्यालय के खिलाफ नोटिस जारी
इस पूरे मामले में डीआईओएस बस्ती संजय सिंह ने मामले को संज्ञान में लेते हुए कहा यह अत्यंत गंभीर मामला है। हमने तत्काल विद्यालय के खिलाफ नोटिस जारी कर यह कहा है कि हर हाल में बालिकाओं का दाखिला स्कूल में लिया जाए और यदि आदेश को नजरंदाज किया गया तो स्कूल के प्रबन्धक सहित प्रिंसिपल पर भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
💬 Comments (0)
Leave a Comment