Child Mental Health: पढ़ाई के बोझ से डरने लगा है आपका बच्चा? पेरेंट्स के लिए ये बातें जानना है बेहद जरूरी

Signs of Academic Pressure: आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में बच्चों को पढ़ाना माता-पिता के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। अक्सर देखा जाता है कि बच्चे पढ़ाई का नाम सुनते ही थका हुआ महसूस करने लगते हैं या अचानक चिड़चिड़े हो जाते हैं। बहुत से पेरेंट्स इसे बच्चे का आलस या मनमानी समझकर उन्हें डांटते हैं लेकिन मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यह व्यवहार आलस नहीं बल्कि मानसिक थकान और अकादमिक दबाव का नतीजा हो सकता है। छोटे बच्चे अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते इसलिए उनका तनाव व्यवहार के जरिए बाहर आता है।

बच्चे के चिड़चिड़ेपन के पीछे छिपे कारण

पढ़ाई के दौरान बच्चे का गुस्सा करना, बार-बार बहाने बनाना या सुस्त पड़ जाना कई गहरी समस्याओं की ओर इशारा करता है। इसके पीछे सबसे प्रमुख कारण माता-पिता की अत्यधिक उम्मीदें होती हैं। जब बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से की जाती है तो उनके मन में हीन भावना घर कर लेती है। इसके अलावा बिना किसी ब्रेक के लंबे समय तक पढ़ाई करना और छोटी-सी गलती पर सख्त सजा मिलना बच्चे को पढ़ाई से दूर करने लगता है। ऐसे में बच्चा विषय से नहीं बल्कि पढ़ाई की प्रक्रिया से ही डरने लगता है।

माता-पिता रखें ये ध्यान

  • बच्चे के तनाव को कम करने के लिए सबसे पहला कदम है उनके साथ क्वालिटी टाइम बिताना। पेरेंट्स को चाहिए कि वे बच्चे से फ्रेंडली व्यवहार करें ताकि वह खुलकर अपनी परेशानी बता सके।
  • पढ़ाई के दौरान जरूरत से ज्यादा सख्ती बच्चे को मानसिक रूप से कमजोर और विद्रोही बना सकती है। प्यार और धीरज से समझाने पर बच्चे का तनाव आधा हो जाता है और उसकी सीखने की क्षमता बढ़ती है।
  • हर बच्चे की सीखने की गति अलग होती है। उसकी प्रगति की तुलना उसके पिछले प्रदर्शन से करें न कि किसी और से।

लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव

  • मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ शारीरिक पोषण भी बच्चों के मस्तिष्क विकास के लिए अनिवार्य है।
  • बच्चों की डाइट में भीगे हुए बादाम और अखरोट शामिल करें। ये ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं जो याददाश्त और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करते हैं।
  • बच्चों को प्रकृति के साथ समय बिताने दें। केवल किताबी ज्ञान काफी नहीं है। खेलकूद और शारीरिक गतिविधियां उनके शरीर में हैप्पी हार्मोन्स रिलीज करती हैं जिससे पढ़ाई का बोझ कम महसूस होता है।

बच्चा एक कोमल पौधे की तरह होता है जिसे अनुशासन से ज्यादा स्नेह और समझ की आवश्यकता होती है। यदि आपका बच्चा पढ़ाई के नाम पर रोता है या थक जाता है तो उसे डांटने के बजाय उसकी मनोदशा को समझने का प्रयास करें। एक सकारात्मक वातावरण ही बच्चे के भविष्य को उज्ज्वल और तनावमुक्त बना सकता है।