Quick Samachar: EXPRESSO: तीन बार ग्रैमी अवॉर्ड जीत चुके भारतीय संगीतकार रिकी केज ने बेंगलुरु में आयोजित एक्सप्रेसो कार्यक्रम में अपने करियर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संबंध, पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपने दृष्टिकोण और संगीत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर खुलकर बातचीत की।

रिकी केज ने बताया कि संगीत की दुनिया में पहचान बनाने से पहले उन्होंने विज्ञापन उद्योग में 13 साल से अधिक समय तक काम किया था। इस दौरान उन्होंने करीब 3,500 विज्ञापनों के लिए संगीत तैयार किया।

उन्होंने कहा कि यह दौर उनके लिए संगीत की सबसे बड़ी पाठशाला साबित हुआ। केज के अनुसार, वह सुबह 7 बजे काम शुरू करते थे और दोपहर तक क्लाइंट की जरूरतों के मुताबिक संगीत तैयार कर देते थे। इस तेज़ रफ्तार माहौल ने उन्हें कम समय में रचनात्मक सोच विकसित करना और अलगअलग तरह के संगीत पर काम करना सिखाया। इसके अलावा उन्होंने अपने नाना के बारे में भी दिलचस्प किस्सा सुनाया।

कम ही लोग जानते होंगे की रिक केज अभिनेतालेखकइंटरनेशनल साइक्लिस्ट जानकी दास के नाती हैं। उन्होंने एक्सप्रेसो के इवेंट में इस बात का जिक्र किया और अपने नाना की बहादुरी और देशभक्ति से जुड़ा एक किस्सा भी सुनाया।

जानकी दास मेहरा भारतीय सिनेमा के उन दुर्लभ व्यक्तित्वों में से थे, जिन्होंने खेल और फिल्म, दोनों क्षेत्रों में असाधारण पहचान बनाई। वह हिंदी सिनेमा के दिग्गज चरित्र अभिनेता, लेखक और भारत के पहले अंतरराष्ट्रीय साइकिलिस्ट माने जाते हैं। करीब छह दशक लंबे करियर में उन्होंने 1,000 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के पहले प्रोडक्शन डिजाइनर होने का सम्मान भी हासिल किया।

ओलंपिक में तिरंगा फहराने का साहस रखते थे जानकी दास

रिकी ने बताया कि वो अपने नाना के बहुत करीब थे। उन्होंने कहा, “मैं म्यूजिकल फैमिली से नहीं आता। मेरे परिवार में दूरदूर तक भी कोई म्यूजिशियन नहीं था। लेकिन मुझे लगता है कि मैंने अपने नाना से बहुत कुछ सीखा। मेरी मां के पिता जानकी दास मेहरा, उन्होंने अपना करियर ओलंपिक साइकलिस्ट के तौर पर शुरू किया। उन्हें बर्लिन ओलंपिक और उन्होंने ब्रिटिश एंपायर गेम्स में भी हिस्सा लिया। उन्होंने कई गोल्ड मेडल जीते। ये सब जीतने के बाद उन्हें उस देश के वेन्यू पर वापस जाना था और उन्हें ब्रिटिश झंडे को खोलना था।”

उन्होंने आगे कहा, “क्योंकि उस वक्त हम ब्रिटिश के हम ब्रिटिश शासन के अधीन थे। वहां जाने से पहले वो महात्मा गांधी से मिले और उन्होंने पूछा कि आप कौन सा झंडा फहराने वाले हो? तो उन्होंने कहा जाहिर सी बात है ब्रिटिश झंडा फहराऊंगा। तो महात्मा गांधी ने कहा कि तुम नेशनल कांग्रेस का झंडा क्यों नहीं फहराते। उस वक्त ये ही भारत के झंडे के रूप में जाना जाता था। तब मेरे नाना जानकी दास मेहरा ने कहा वो शायद मुझे मार डालेंगे। लेकिन महात्मा गांधी ने कहा कि अगर तुम ऐसा करते हो तो तुम हमेशा के लिए जिंदा रहोगे। तुम पहले भारतीय होंगे जो विदेश की मिट्टी पर भारत का झंडा फहराओगे।”

उन्होंने आगे बताया कि महात्मा गांधी ने उनके नाना को भारत का झंडा दिया और उन्होंने वहां जाकर वो ही फहराया। जिसके बाद जानकी दास को भारत वापस भेजा गया।