Quick Samachar: EXPRESSO: बॉलीवुड और फिल्मी संगीत भले ही आज भी लोकप्रियता के चार्ट पर छाए रहते हों, लेकिन तीन बार ग्रैमी अवॉर्ड जीत चुके संगीतकार रिकी केज का मानना है कि सांस्कृतिक सीमाओं को वास्तव में शास्त्रीय संगीतकारों ने तोड़ा है।

बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में रिकी केज ने इसे पंडित रवि शंकर इफेक्ट बताया। उन्होंने कहा कि जहां बॉलीवुड संगीत विदेशों में मुख्य रूप से भारतीय प्रवासियों को आकर्षित करता है, वहीं रवि शंकर जैसे शास्त्रीय संगीतकारों के कार्यक्रमों में अलगअलग देशों और संस्कृतियों के लोग बड़ी संख्या में शामिल होते थे।

रिकी केज ने याद करते हुए बताया कि जब वह 19 साल की उम्र में अमेरिका के बे एरिया में रवि शंकर का कॉन्सर्ट देखने गए थे, तो वहां मौजूद दर्शकों को देखकर हैरान रह गए। उन्होंने कहा कि इससे पहले उन्होंने अमेरिका में कई बॉलीवुड कॉन्सर्ट देखे थे, जिनमें ज्यादातर भारतीय मूल के लोग शामिल होते थे। लेकिन पंडित रवि शंकर के कार्यक्रम में थिएटर के भीतर मौजूद लोगों की विविधता शहर की पूरी आबादी का प्रतिनिधित्व कर रही थी, जो उनके लिए एक अलग अनुभव था।

रिकी केज ने अपने पर्यावरण संरक्षण के नजरिए और दिग्गज संगीतकार स्टुअर्ट कोपलैंड के साथ काम करने के अनुभव पर भी बात की। दोनों ने साथ मिलकर डिवाइन टाइड्स एल्बम पर काम किया था। केज ने बताया कि कई बार वह कोपलैंड के संगीत संबंधी फैसलों से शुरुआत में सहमत नहीं होते थे, लेकिन उन्होंने उन विचारों को समय देने का फैसला किया। दो हफ्तों तक किसी धुन या विचार के साथ रहने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि कोपलैंड लगभग हर बार सही साबित होते थे।

संगीत की दुनिया में आने से पहले रिकी केज ने 13 साल से अधिक समय विज्ञापन उद्योग में बिताए और करीब 3,500 विज्ञापनों के लिए संगीत तैयार किया। उन्होंने कहा कि यह अनुभव उनके लिए संगीत सीखने का सबसे बड़ा माध्यम साबित हुआ।

केज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें जलवायु परिवर्तन और वैश्विक एकता पर आधारित एक एल्बम बनाने का सुझाव दिया था, जिसमें दुनिया भर के कलाकार शामिल हों। इसी विचार से बाद में शांति समसारा एल्बम तैयार हुआ।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर अपनी राय रखते हुए केज ने कहा कि संगीत के क्षेत्र में AI भी एक नए उपकरण की तरह है, ठीक वैसे ही जैसे 2000 के दशक में वर्चुअल इंस्ट्रूमेंट्स आए थे। उनके मुताबिक AI सामान्य और त्वरित संगीत तैयार करने में मदद कर सकता है, लेकिन रचनात्मकता, कौशल और नवाचार से भरपूर संगीत रचना में मानवीय संगीतकारों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण बनी रहेगी।