Quick Samachar: हर साल 17 जून को ‘विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस’ मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को लेंड डिग्रेडेशन, मरुस्थलीकरण और सूखे जैसी गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति जागरूक करना है। यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली ने 1994 में इस दिवस की शुरुआत की थी और आज यह दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण अभियान बन चुका है।
साल 2026 की थीम है ‘रेंज लैंड्स: रिकॉग्नाइज. रिस्पेक्ट. रिस्टोर.’ यानी घास के मैदानों और चरागाहों को पहचानें, उनका सम्मान करें और उन्हें पुनर्स्थापित करें। ये क्षेत्र न केवल जैव विविधता को बचाते हैं बल्कि खाद्य सुरक्षा, जल संरक्षण और जलवायु संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मरुस्थलीकरण क्या है?
जब उपजाऊ भूमि धीरेधीरे अपनी उत्पादकता खो देती है और बंजर बनने लगती है, तो इस प्रक्रिया को मरुस्थलीकरण कहा जाता है। अत्यधिक पेड़ों की कटाई, जलवायु परिवर्तन, अंधाधुंध खेती, पानी का अत्यधिक दोहन और गलत भूमि प्रबंधन इसके प्रमुख कारण हैं। आज दुनिया के लगभग आधे चरागाह क्षेत्र क्षरण का सामना कर रहे हैं, जिससे खाद्य उत्पादन, जल स्रोत और लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
भारत के प्रयास
भारत 1996 से संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम सम्मेलन का सदस्य है। देश ने वर्ष 2030 तक लाखों हेक्टेयर क्षतिग्रस्त भूमि को पुनर्स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा ग्रीन इंडिया मिशन, राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम, CAMPA, डेजर्ट डेवलपमेंट प्रोग्राम और मैंग्रोव संरक्षण जैसी कई योजनाएं भूमि संरक्षण की दिशा में काम कर रही हैं। हालांकि केवल सरकारी प्रयास ही पर्याप्त नहीं हैं। आम नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है।
आम लोग कैसे ला सकते हैं बदलाव?
1. अधिक से अधिक पेड़ लगाएं
पेड़ मिट्टी को कटाव से बचाते हैं, भूजल स्तर बनाए रखने में मदद करते हैं और कार्बन को अवशोषित कर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करते हैं। अपने घर, स्कूल, कार्यालय या समुदाय में वृक्षारोपण अभियान का हिस्सा बनें।
2. पानी की बचत करें
सूखे की समस्या से निपटने के लिए जल संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग अपनाएं, पानी का अनावश्यक उपयोग कम करें और रिसाव वाली पाइपलाइन या नलों को तुरंत ठीक करवाएं।
3. स्थानीय और टिकाऊ उत्पादों को प्राथमिकता दें
ऐसे उत्पाद चुनें जिनके उत्पादन में कम पानी और कम प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग हुआ हो। स्थानीय किसानों से खरीदारी करना भी पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।
4. मिट्टी को स्वस्थ रखने में योगदान दें
घरों में किचन वेस्ट से कम्पोस्ट बनाकर जैविक खाद तैयार करें। केमिकल फर्टिलाइजर पर निर्भरता कम करने से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है।
5. हरियाली बढ़ाने वाले सामुदायिक अभियानों में शामिल हों
स्थानीय पार्कों, तालाबों, जंगलों और खुले क्षेत्रों के संरक्षण से जुड़े अभियानों में भाग लें। सामूहिक प्रयासों का असर अधिक व्यापक होता है।
6. भोजन की बर्बादी रोकें
खाद्य उत्पादन में भूमि, पानी और ऊर्जा का उपयोग होता है। भोजन की बर्बादी कम करके हम अप्रत्यक्ष रूप से प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव घटा सकते हैं।
7. पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाएं
सोशल मीडिया, स्कूलों और समुदायों के माध्यम से लोगों को भूमि संरक्षण और वाटर कंजर्वेशन के महत्व के बारे में जागरूक करें। छोटीछोटी जानकारी भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकती है।
क्यों जरूरी है हमारी भागीदारी?
भूमि केवल खेती का साधन नहीं है, बल्कि यह भोजन, पानी, जैव विविधता और लाखों लोगों की आजीविका का आधार है। यदि भूमि क्षरण और मरुस्थलीकरण की समस्या बढ़ती रही, तो भविष्य में खाद्य और जल संकट और गंभीर हो सकते हैं।
💬 Comments (0)
Leave a Comment