Quick Samachar: कश्मीर में दशकों से पाकिस्तान जिस ‘धर्मयुद्ध’ या ‘जिहाद’ का राग अलापता रहा है, उसका असली और घिनौना सच अब दस्तावेजों के साथ दुनिया के सामने आ रहा है। घाटी में मजहब के नाम पर खूनखराबा करने आए विदेशी और पाकिस्तानी आतंकियों का मकसद कभी भी कोई ‘मुकद्दस’ लड़ाई नहीं था। मुठभेड़ों में मारे गए इन आतंकियों की जेबों से जब सुरक्षाबलों ने तलाशी ली, तो उनमें से शहादत के पैगाम नहीं, बल्कि कश्मीरी लड़कियों को लिखे गए ‘लव लेटर्स’ और कंडोम जैसी चीजें बरामद हुईं। यह खुलासा उस खतरनाक नेक्सस को बेनकाब करता है, जिसने कश्मीर की भोलीभाली आवाम को धोखा देकर आतंक के नाम पर केवल अय्याशी का खेल खेला है।

इस सनसनीखेज हकीकत से पर्दा उठाया है एक पूर्व कश्मीरी आतंकी और बाद में भारतीय सेना के लिए अंडरकवर ऑपरेटिव के तौर पर शानदार काम कर चुके मुश्ताक अहमद भट ने। मुश्ताक का कोडनेम अशफाक/रोमियो था। हाल ही में यूट्यूबर प्रखर गुप्ता के लोकप्रिय पॉडकास्ट पर एक इंटरव्यू में मुश्ताक ने इस काले सच को देश के सामने रखा। मुश्ताक ने 90 के दशक से लेकर 2016 तक के आतंक के उस स्याह अध्याय को खोलकर रख दिया, जिसे पाकिस्तान हमेशा दुनिया से छिपाना चाहता है। उन्होंने बताया कि सरहद पार से आने वाले आतंकी ‘मुजाहिद’ होने का चोला ओढ़कर घाटी में केवल अपनी हवस मिटाने और स्थानीय लड़कियों की जिंदगी बर्बाद करने आते थे।
जेबों से मिले ‘लव लेटर्स’ और विदेशी आतंकियों का धोखा पॉडकास्ट में मुश्ताक ने कैमरे के सामने उन ‘लव लेटर्स’ के पुराने बंडल दिखाए, जो मारे गए पाकिस्तानी आतंकियों की जेबों से निकाले गए थे। अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू में लिखे गए इन खतों में जिहाद की कोई बात नहीं थी, बल्कि विशुद्ध रूप से कश्मीरी लड़कियों को फंसाने के लिए लिखी गई प्रेम कहानियां और कसमें थीं। मृत आतंकियों की जेबों से मिले खतों में लिखा था पापी से नहीं, पाप से नफरत करो… मैं तुम्हारे अच्छे कैरेक्टर से प्यार करता हूं…। मुश्ताक ने बताया कि विदेशी आतंकी मासूम कश्मीरी लड़कियों को ऐसे ही झूठे खतों और आशिकी के जाल में फंसाते थे।
‘जिहाद’ के नाम पर अय्याशी के सुबूत कहानी सिर्फ लव लेटर्स तक सीमित नहीं है। पूर्व कमांडर ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि कई मुठभेड़ों में पकड़े गए या मारे गए पाकिस्तानी आतंकियों की तलाशी में उनके पास से ‘कंडोम’ बरामद हुए थे। जब सुरक्षाबलों या मुश्ताक जैसे ऑपरेटिव्स ने पकड़े गए आतंकियों से सख्ती से पूछा कि अगर वे यहां इस्लाम के नाम पर ‘धर्मयुद्ध’ लड़ने आए हैं, तो इन चीजों का क्या काम है? तो वे बौखलाकर काफिरकाफिर चिल्लाने लगते थे। यह साफ दर्शाता है कि जो आतंकी कश्मीर में ‘हूरों’ के पास जाने का ख्वाब लेकर आने का दावा करते थे, वे असल में यहां धरती पर ही स्थानीय महिलाओं का शोषण करने की फिराक में रहते थे।
नाजायज रिश्ते और बर्बाद होती कश्मीरी जिंदगियां इंटरव्यू में एक और खौफनाक हकीकत सामने आई, जिस पर कश्मीर में अक्सर खामोशी ओढ़ ली जाती है। शोपियां और दक्षिण कश्मीर के कई गांवों में आज भी ऐसे बच्चे मौजूद हैं, जो पाकिस्तानी आतंकियों की अवैध संतानें हैं। मुश्ताक के मुताबिक, विदेशी आतंकी स्थानीय घरों में पनाह लेते थे और ‘बांग्लादेशी स्टाइल’ की छद्म शादियां कर वहां की लड़कियों के साथ रिश्ते बनाते थे। यमरश और उरपोरा नागबल गांवों का उदाहरण देते हुए बताया गया कि साजिद और आदिल पठान जैसे पाकिस्तानी आतंकियों ने कश्मीरी लड़कियों से शादियां कीं और फिर मुठभेड़ में मारे गए। पीछे छूट गए उनके बच्चे और वो लड़कियां, जो आज भी समाज में कलंकित होकर अपनी जिंदगी काट रही हैं।
मुजाहिद नहीं, महज हवस के पुजारी दशकों से ‘शहीद’ और ‘मुजाहिद’ का तमगा ओढ़कर कश्मीर की वादियों को लहूलुहान करने वाले इन आतंकियों की असलियत अब सामने है। प्रखर गुप्ता के पॉडकास्ट में दिखाए गए ये सुबूत इस बात का अकाट्य प्रमाण हैं कि कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद कभी भी कोई मजहबी या वैचारिक लड़ाई नहीं रही। यह एक ऐसा धंधा था, जिसमें युवाओं के हाथों में पत्थर और बंदूकें थमाकर, बड़े कमांडरों और पाकिस्तानी आतंकियों ने केवल अपनी अय्याशी के अड्डे बनाए। यह सच घाटी के उन युवाओं के लिए एक बड़ा आईना है, जो आज भी पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा का शिकार होकर अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं।
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