खर्राटों का कारण
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खर्राटों को अक्सर लोग मजाक में लेते हैं और इसे सामान्य आदत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन सच यह है कि बार-बार और तेज आवाज में खर्राटे लेना किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। MedFirst ENT सेंटर में कंसल्टेंट डॉक्टर राजेश भारद्वाज,कहते हैं कि खासतौर पर अगर सोते समय सांस रुक-रुक कर आती है या व्यक्ति को दिनभर थकान महसूस होती है, तो यह स्थिति चिंता का विषय हो सकती है। चलिए जानते हैं कब आपको सावधान हो जाना चाहिए?

खर्राटे क्यों आते हैं?

खर्राटे तब आते हैं जब सोते समय गले की मांसपेशियां ढीली हो जाती हैं और सांस लेने का रास्ता संकरा हो जाता है। इस वजह से हवा का प्रवाह बाधित होता है और कंपन पैदा होता है, जिससे खर्राटों की आवाज आती है। कभी-कभी यह सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि यह रोजाना की समस्या बन जाए तो इसके पीछे गंभीर कारण हो सकते हैं।

खर्राटों के पीछे कारण

खर्राटों के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे मोटापा, नाक का बंद होना, एलर्जी, शराब का सेवन या गलत सोने की पोजीशन। मोटापे की वजह से गले के आसपास अतिरिक्त फैट जमा हो जाता है, जिससे सांस का रास्ता और भी संकरा हो जाता है। वहीं, पीठ के बल सोने से भी खर्राटे बढ़ सकते हैं।

किन समस्याओं का खतरा बढ़ता है? 

डॉक्टरों के अनुसार, लगातार खर्राटे लेना स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में व्यक्ति की सांस नींद के दौरान बार-बार रुक जाती है और फिर शुरू होती है। इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे हृदय और मस्तिष्क पर बुरा असर पड़ सकता है। लंबे समय तक इसका इलाज न करने पर हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज और स्ट्रोक जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

खर्राटों को कंट्रोल करने के लिया क्या करें?

इस समस्या को हल्के में लेने के बजाय समय रहते पहचानना और इलाज करवाना जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति तेज खर्राटे लेता है, नींद में घुटन महसूस करता है, सुबह सिरदर्द रहता है या दिनभर नींद आती है, तो उसे तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। लाइफस्टाइल में बदलाव जैसे वजन कम करना, नियमित व्यायाम करना, शराब और धूम्रपान से दूरी बनाना और सही सोने की आदत अपनाना काफी हद तक इस समस्या को कम कर सकते हैं।