Quick Samachar: भारत में प्रीमियम शराब की मांग में ज़ोरदार बढ़ोतरी देखी जा रही है, जबकि दुनिया भर में कंज्यूमर सस्ती शराब की ओर मुड़ रहे हैं. आईडब्ल्यूएसआर के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में प्रीमियम और सुपर-प्रीमियम शराब सेगमेंट में वॉल्यूम के हिसाब से करीब 9 फीसदी और वैल्यू के हिसाब से 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जो दुनिया भर में आई गिरावट के बिल्कुल विपरीत है. लंदन में स्थित इस इंडस्ट्री ट्रैकर ने 22 बड़े बाजारों का सर्वे किया, जिनमें दुनिया भर की शराब की खपत का करीब तीन-चौथाई हिस्सा शामिल है. इन बाजारों में पिछले साल शराब की कुल सेल का वॉल्यूम 2 फीसदी गिरा और वैल्यू में 4 फीसदी की कमी आई. साल 2020 के बाद यह पहली बार गिरावट दर्ज की गई है.

कंपनियां बदल रही रणनीति
आईडब्ल्यूएसआर के मैनेजिंग डायरेक्टर मार्टेन लोडेविजक्स ने कहा कि शराब बनाने वाली बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां, जिनकी पिछली स्ट्रैटिजी मुख्य रूप से लगातार प्रीमियम बनाने पर केंद्रित थीं, अब अपनी रणनीति बदल रही हैं. हाल के रीफॉर्मेशन और लीडरशिप में बदलाव से पता चलता है कि अब उनका ज्यादा ध्यान वॉल्यूम, प्रासंगिकता और अलग-अलग कीमतों वाली कैटेगरीज में संतुलित पोर्टफोलियो पर है, न कि सिर्फ मुनाफा बढ़ाने पर. जहां एक तरफ दुनिया भर में शराब का कारोबार कंज्यूमर्स के कम होते भरोसे और प्रीमियम शराब की घटती मांग से प्रभावित हुआ, वहीं भारत में कीमतें बढ़ने और कंज्यूमर्स के ज्यादा सतर्क होने के बावजूद वॉल्यूम में 4 फीसदी और वैल्यू में 5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
भारत में 410 मिलियन से ज्यादा केस की खपत
Suntory Global Spirits India के मैनेजिंग डायरेक्टर नीरज कुमार ने कहा कि प्रीमियम बनाने का चलन देश में शराब की कैटेगिरी को लगातार आगे बढ़ा रहा है. उन्होंने कहा कि भारत ने प्रीमियम बनाने के मामले में एक ‘उज्ज्वल स्थान’ के तौर पर अपनी रेलेवेंसी और दुनिया भर में अपनी अहम भूमिका को साबित किया है. हम इस बदलाव को साफ तौर पर देख रहे हैं—समझदार कंज्यूमर अब ज्यादा से ज्यादा प्रतिष्ठित व्हिस्की और प्रीमियम ‘व्हाइट स्पिरिट्स’ को चुन रहे हैं, जिससे वॉल्यूम के बजाय वैल्यू को ज्यादा बढ़ावा मिल रहा है.
वॉल्यूम के हिसाब से भारत शराब पीने वाला दुनिया का सबसे बड़ा देश है, जहां 410 मिलियन से ज्यादा केस की खपत होती है. हालांकि, इंपोर्टेड शराब पर ज्यादा टैक्स होने की वजह से लग्जरी और महंगी शराब में इसकी हिस्सेदारी 5 फीसदी से भी कम है. जहां देश में शराब पीने वाले करीब आधे कंज्यूमर सिर्फ सस्ती और बिना ब्रांड वाली शराब ही खरीद सकते हैं, वहीं तेजी से बढ़ता मिडिल क्लास—जो प्रीमियम और उससे ऊपर की कैटेगिरी की शराब खरीदने की क्षमता रखता है—की संख्या करीब 150 मिलियन होने का अनुमान है.
पिछले हफ्ते Pernod Ricard ने बताया कि मार्च तिमाही में भारत में उसके कारोबार में 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. भारत Pernod Ricard के लिए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार है. कंपनी की चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर हेलेन डी टिसोट ने निवेशकों को बताया कि भारतीय बाजार में कंज्यूमर्स से जुड़े फंडामेंटल फैक्टर लगातार मजबूत बने हुए हैं. इसके अलावा, शराब की मजबूत डिमांड और प्रीमियम बनाने के लगातार जारी चलन से हमारी बिक्री को भी काफी फायदा मिल रहा है.
भारत दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट
भारत में हर साल 2 करोड़ से ज्यादा लोगों के कानूनी तौर पर शराब पीने की उम्र में आने की उम्मीद है, इसलिए ज्यादातर ग्लोबल कंपनियां इस देश को अपने टॉप तीन प्रायोरिटी मार्केट में से एक मानती हैं. Diageo और Pernod Ricard, जो दुनिया की दो सबसे बड़ी स्पिरिट कंपनियां हैं, उनके लिए भारत वॉल्यूम के मामले में सबसे बड़ा मार्केट है. वे ज्यादा वॉल्यूम के पीछे भागने के बजाय, ज्यादा मार्जिन कमाने की अपनी रणनीति के तहत प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर फोकस करने की कोशिश कर रही हैं. Lodewijks ने कहा कि 2025 का उतार-चढ़ाव भरा साल ड्रिंक्स इंडस्ट्री को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर गया है. “टैरिफ में रुकावट और सतर्क कस्टमर्स की वजह से प्रीमियम प्रोडक्ट्स की रणनीतियों पर दबाव पड़ा, जबकि उभरते हुए मार्केट एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आए.
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